एमिटी विश्वविद्यालय में अंडरग्रेजुएट समर रिसर्च फेलोशिप के चौथे संस्करण का शुभारंभ

एमिटी विश्वविद्यालय में अंडरग्रेजुएट समर रिसर्च फेलोशिप के चौथे संस्करण का शुभारंभ

एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा अपने प्रमुख अनुसंधान कार्यक्रम ’’अंडरग्रेजुएट समर रिसर्च फेलोशिप (यूएसआरएफ 2026)’’ के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। यह पूर्णतः आवासीय शोध कार्यक्रम है, जिसकी अवधि 4 से 8 सप्ताह है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डा एम के दत्ता, एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक डा मनोज पंाडेय और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की निदेशक डा पूजा राघवन द्वारा किया गया। इस फेलोशिप के माध्यम से भारत एवं विदेशों के 30 स्नातकों (अंडरग्रेजुएट) विद्यार्थियों को अनुभवी फैकल्टी मेंटर्स के मार्गदर्शन में अत्याधुनिक शोध परियोजनाओं पर कार्य करने का अवसर प्रदान किया जाता है।

’’अंडरग्रेजुएट समर रिसर्च फेलोशिप (यूएसआरएफ 2026)’’ में देश भर के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 3,495 आवेदन मिले हैं, जो इस प्रोग्राम की व्यापक राष्ट्रीय पहुंच को दिखाता है। इंजीनियरिंग क्षेत्र में सबसे ज्यादा आवेदन मिले, इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी, साइंस, मैनेजमेंट, फार्मेसी और हेल्थकेयर का नंबर रहा, जो इस फेलोशिप की अलग-अलग विषयों को जोड़ने वाली प्रकृति को दर्शाता है। आईआईटी, आईआईआईटी, एनआईटी, बिट्स  पिलानी, केन्द्रीय विश्वविद्यालय और प्रमुख निजी विश्वविद्यालय़ जैसे बेहतरीन संस्थानों के लगभग 30 छात्रों को फेलोशिप के लिए चयन  किया गया है। इससे यूएसआरएफ की भारत के सबसे पसंदीदा अंडरग्रेजुएट रिसर्च प्रोग्राम में से एक के तौर पर पहचान और मज़बूत हुई है।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो-वाइस चांसलर डॉ. एम.के. दत्ता ने कहा कि इस फेलोशिप का उददेश्य स्नातक छात्रों को शुरुआती दौर में ही अनुसंधान से परिचित कराना है। साथ ही, शिक्षकों के मार्गदर्शन और मिलकर किए जाने वाले प्रोजेक्ट्स के ज़रिए नवाचार, महत्वपूर्ण सोच और अलग-अलग विषयों की मिली-जुली सीख को बढ़ावा देना है। अब जब स्नातक स्तर पर अनुसंधान तेज़ी पकड़ रही है, तो छात्रों को इस मौके का फ़ायदा उठाकर ज़बरदस्त नवाचार करने और आज की चुनौतियों से निपटने में योगदान देना चाहिए। यह फेलोशिप वैज्ञानिक सोच, इनोवेशन और रिसर्च में बेहतरीन काम करने की क्षमता विकसित करने में मदद करेगी, साथ ही छात्रों को आगे की पढ़ाई और रिसर्च-ओरिएंटेड करियर के लिए तैयार करेगी।

एमिटी स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. मनोज कुमार पांडे ने कहा कि यूएसआरएफ 2026 एमिटी विश्वविद्यालय के उस दृष्टिकोण को दिखाता है जिसमें स्नातक शिक्षा में शोध को शामिल किया जाता है और भविष्य के वैज्ञानिकों, नवाचारकों और ज्ञान नेतृत्वकर्ताओ की एक मज़बूत पाइपलाइन तैयार की जाती है। विश्व स्तरीय अनुसंधान सुविधाओं और अलग-अलग विषयों के बीच सहयोग का शुरुआती अनुभव देकर, यह फेलोशिप छात्रों को वैज्ञानिक प्रगति और सामाजिक विकास में सार्थक योगदान देने के लिए सशक्त बनाती है। प्रतिभागियों को अपने ज्ञान, सीखने की क्षमता और स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए इस मौके का इस्तेमाल करना चाहिए।

विदित हो कि कार्यक्रम में शामिल युवा रिसर्च फेलो को हर हफ़्ते 1,000 रूपये का स्टाइपेंड, कैंपस में मुफ़्त हॉस्टल सुविधा, चुने गए प्रतिभागियों के लिए ट्रेन यात्रा में मदद और आवेदन फीस में छूट प्रदान की जायेगी। यह प्रोग्राम उन प्रतिभागियों को भी कम शुल्क पर शामिल होने का मौका देता है जो फेलो नहीं हैं। इसके अलावा, प्रतिभागियों को एमिटी यूनिवर्सिटी के अत्याधुनिक शोध पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ मिलेगा, जिसमें अत्याधुनिक लैबोरेटरी के साथ-साथ एडवांस्ड कंप्यूटिंग और अलग-अलग विषयों से जुड़ी रिसर्च सुविधाएं शामिल हैं। यूएसआरएफ के चौथे एडिशन को मिली प्रतिक्रिया युवा शोधार्थियों के बीच अनुसंधान आधारित शिक्षण की बढ़ती चाहत को दिखाता है और भारत में रिसर्च में उत्कृष्टता और इनोवेशन-बेस्ड एजुकेशन को बढ़ावा देने में एमिटी विश्वविद्यालय के लीडरशिप को मज़बूत करता है।