यमुना एक्सप्रेसवे के औद्योगिक सेक्टरों पर  टोल: क्या ऐसे विकसित होगा उद्योग? - सुरेंद्र नाहटा

यमुना एक्सप्रेसवे के औद्योगिक सेक्टरों पर  टोल: क्या ऐसे विकसित होगा उद्योग? - सुरेंद्र नाहटा

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को उत्तर भारत का एक प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक केंद्र बनाने का सपना दिखाकर हजारों उद्यमियों और निवेशकों को सेक्टर 32, 33 तथा अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश के लिए आकर्षित किया। इन क्षेत्रों को देश के सबसे आधुनिक औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में प्रचारित किया गया, जहां विश्वस्तरीय सड़कें, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का वादा किया गया था।

लेकिन वर्तमान स्थिति उद्योगपतियों और उद्यमियों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। यदि सेक्टर 32 जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में आने-जाने के लिए प्रत्येक दिशा में लगभग ₹80 का टोल देना पड़े, अर्थात प्रतिदिन ₹160 का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़े, तो यह प्रश्न स्वाभाविक है कि वहां उद्योग किस प्रकार फल-फूल सकेंगे?

किसी भी औद्योगिक क्षेत्र की सफलता उसकी सुगम पहुंच, कम परिवहन लागत और बेहतर बुनियादी सुविधाओं पर निर्भर करती है। यदि एक फैक्ट्री मालिक, कर्मचारी, सप्लायर और ट्रांसपोर्टर को प्रतिदिन भारी टोल का भुगतान करना पड़े, तो उत्पादन लागत स्वतः बढ़ जाएगी। इसका सीधा प्रभाव उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ेगा और निवेशक ऐसे क्षेत्रों में निवेश करने से हिचकेंगे।

विरोधाभास यह है कि जिन भूखंडों को "यमुना एक्सप्रेसवे की उत्कृष्ट कनेक्टिविटी" का हवाला देकर बेचा गया, उन्हीं क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए अब अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। यदि औद्योगिक क्षेत्र के भीतर कार्य करने वाले उद्यमियों को ही बार-बार टोल देना पड़े, तो यह औद्योगिक विकास की मूल अवधारणा के विपरीत प्रतीत होता है।

इसके अतिरिक्त, अनेक उद्योगपतियों ने यह भी शिकायत की है कि कई औद्योगिक सेक्टरों में आज भी सड़क, बिजली, जल निकासी और अन्य आधारभूत सुविधाएं पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में एक ओर उद्योगों को शीघ्र संचालन के लिए दबाव दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आवश्यक सुविधाओं और सुगम पहुंच का अभाव बना हुआ है।

यदि सरकार और यमुना प्राधिकरण वास्तव में इस क्षेत्र को एक वैश्विक औद्योगिक हब बनाना चाहते हैं, तो उन्हें औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत उद्यमियों, कर्मचारियों और स्थानीय आवागमन के लिए टोल में विशेष छूट या पूर्ण छूट देने पर विचार करना चाहिए। उद्योगों को प्रोत्साहन देने के बजाय यदि उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जाएगा, तो निवेश और रोजगार सृजन दोनों प्रभावित होंगे।

यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र का विकास केवल भूमि बेचने से नहीं, बल्कि उद्योगों को सुचारु रूप से चलाने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने से होगा। यदि उद्योगपति ही अपने औद्योगिक क्षेत्र तक पहुंचने के लिए प्रतिदिन भारी टोल चुकाने को मजबूर होंगे, तो यह प्रश्न हमेशा बना रहेगा कि "ऐसे में यहां उद्योग कैसे विकसित होंगे?"