डॉक्टरों ने 6 घंटे में ब्रेस्ट कैंसर, खराब हार्ट वाल्व और ब्लॉकेज का एक साथ किया सफ़ल इलाज़

65 वर्षीय श्रीमती अमर का एक ही ऑपरेशन में ब्रेस्टु कैंसर, गंभीर एओर्टिक वाल्म की बीमारी और क्रिटिकल कोरोनरी ब्लॉकेज का इलाज किया गया।

माना जा रहा है कि एक ही ऑपरेशन के तहत तीन सफल प्रक्रियाओं वाला यह दिल्ली/NCR में रिपोर्ट किया गया पहला मामला है।

ग्रेटर नोएडाः शारदाकेयर-हेल्थसिटी के डॉक्टरों ने 65 साल की एक महिला में शुरुआती स्टेज के ब्रेस् कैंसर, गंभीर एओर्टिक वॉल्म स्ट्रेनोसिस और गंभीर कोरोनरी आर्टरी बीमारी का एक साथ इलाज 6 घंटे तक चली एक दुर्लभऔर बहुत जटिल सर्जरी से सफलतापूर्वक किया। डॉक्टरों की टीम में कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर और हेड डॉ. अखिल कुमार रुस्मृगी और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट और यूनिट हेड डॉ. हेमकांत वर्मा शामिल थे। उन्होंने एक मल्टी-डिसिप्लिनरी प्रक्रिया अपनाई, जिससे वे एक ही ऑपरेशन में जानलेवा बीमारियों की इन तीन बीमारियों को खत्म करने में सफल रहे। इससे कैंसर का समय पर इलाज हो सका और साथ ही हृदय की जानलेवा स्थिति को भी रोका जा सका। किसी एक मरीज़ में इन तीनों गंभीर बीमारियों का एक साथ होना बहुत दुर्लभ है। दिल्ली-NCR में अपनी तरह का यह पहला मामला है।

मरीज़ श्रीमती अमर एक रिटायर्ड मीडिया प्रोफेशनल हैं। उन्होंने हाल ही में अपने दाहिने ब्रेस्ट् में एक गांठ महसूस की थी और उन्हें शुरुआती स्टेज का दाहिने ब्रेस्ट का कैंसर (कार्सिनोमा) होने का पता चला। शुरू में ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी की योजना बनाई गई थी, जिसमें ब्रेस्ट् को सुरक्षित रखा जाता है और आमतौर पर इसके बाद रेडियोथेरेपी की जाती है।

हालांकि सर्जरी से पहले की रूटीन जांच के दौरान उनके हृदय की धड़कन में एक असामान्य आवाज़ (जिसे कार्डियक मरमर कहा जाता है) का पता चला। यह संकेत अक्सर हृदय के वॉल्स की किसी अंदरूनी समस्सा की ओर इशारा करता है। भले ही मरीज़ में हृदय से जुड़ी कोई खास समस्सा नहीं थी, लेकिन इस क्लीनिकल जांच के बाद हृदय की और आगे की जांच करने का फैसला किया गया।

आगे की जांच में 2D इकोकार्डियोग्राफी भी की गयी। इसमें पता चला कि उन्हें बायकस्पिड एओर्टिक वॉल्व के कारण 'सीवियर एओर्टिक वॉल्व स्ट्रेनोसिस' की समस्या थी, जिसमें वॉल्व का रास्ता काफ़ी संकरा हो गया था। अगर इसका इलाज न किया जाता, तो इस स्थिति के कारण हार्ट फेलियर या अचानक कार्डियक डेथ (दिल की धड़कन रुकने से मौत) हो सकती थी।

आगे की कोरोनरी एंजियोग्राफी में एक और गंभीर बात सामने आई कि हृदय की सबसे महत्वपूर्ण आर्टरीज (रक्त वाहिकाओ) में से एक 'लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग कोरोनरी आर्टरी में 90% ब्लॉकेज था। हैरानी की बात यह थी कि हृदय से जुड़ी ये दोनों जानलेवा स्थितियां पूरी तरह से बिना किसी लक्षण के थीं। मरीज़ को कोई खास चेतावनी वाले लक्षण महसूस नहीं हुए थे। मरीज़ एक साथ तीन गंभीर बीमारियों जैसे कि शुरुआती स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर, गंभीर एओर्टिक वॉल्व की बीमारी और गंभीर कोरोनरी आर्टरी बनोकेज की बीमारी से जूझ रही थीं। इसलिए इलाज का सबसे सुरक्षित तरीका तय करने के लिए सर्जिकल ऑन्‌कोलॉजी, कार्डियोलॉजी, कार्डियक एनेस्थीसिया और कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी के विशेषज्ञों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने विस्तार से चर्चा की।

यह देखते हुए कि ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी के बाद रेडियोथेरेपी की ज़रूरत पड़ती और मरीज़ को तुरंत ओपन हार्ट सर्जरी की भी ज़रूरत थी, इसीलिए टीम ने मरीज़ और उनके परिवार की सहमति लेने के बाद इलाज का तरीका बदल दिया। इसके बाद मरीज़ की ब्रेस्ट कैंसर के लिए मॉडिफाइड रेडिकल मास्ट्रेक्टॉमी, प्रोस्थेटिक वॉल्स के साथ 'एओर्टिक वॉल्स रिप्लेसमेंट' और सिंगल ग्राफ्ट का इस्तेमाल करके कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग की गई। ये तीनों प्रक्रियाएँ छह घंटे की एक ही सर्जरी में सफलतापूर्वक पूरी कर ली गईं।

ऑपरेशन के बाद मरीज़ की रिकवरी बिना किसी समस्मा के हुई। बाद में की गई इकोकार्डियोग्राफी से पता चला कि मैकेनिकल एओर्टिक वॉल्स ठीक से काम कर रहा था, हृदय का काम बहुत अच्छा था, और वॉल्स से लीकेज या कोई और दिक्कत नहीं थी। उन्हें ऑन्‌कोलॉजी फॉलो-अप के साथ स्थिर हालत में छुट्टी दे दी गई।

इस मामले के बारे में बात करते हुए शारदाकेयर हेल्थसिटी के कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर और हेड, डॉ. अखिल कुमार रुस्स्रगी ने कहा, 'यह तकनीकी रूप से सबसे मुश्किल सर्जरी में से एक थी क्योंकि हमें एक ही समय में कैंसर की सर्जरी करनी थी, बुरी तरह खराब हो चुके एओर्टिक वॉल्व को बदलना था, और गंभीर रूप से बनॉक हो चुकी कोरोनरी आर्टरी का बाईपास करना था। एओर्टिक वॉल्स बहुत ज़्यादा सिकुड़ गया था, जिससे यह प्रक्रिया और भी चुनौतीपूर्ण हो गई। तीनों सर्जरी एक साथ करने के लिए बहुत सावधानी से योजना बनाने और कई स्पेशलिटीज़ के बीच बेहतरीन तालमेल की ज़रूरत थी। इस संयुक्त प्रक्रिया को पूरा करने से न केवल हृदय की जानलेवा स्थिति को रोका जा सका, बल्कि यह भी सुनिश्चित हुआ कि मरीज़ के कैंसर के इलाज में देरी न हो। यह मामला रूटीन प्री-ऑपरेटिव जांच के महत्व को भी दर्शाता है। हृदय से जुड़ी कोई बड़ी समस्सा न होने के बावजूद सावधानीपूर्वक क्लीनिकल जांच के कारण मरीज़ की जानलेवा हृदय सम्बन्धी बीमारियों का जल्दी पता चल गया। इससे डॉक्टर गंभीर जटिलताओं के होने से पहले ही इलाज कर पाए। अगर इलाज में देरी होती, तो मरीज़ को गंभीर एओर्टिक स्ट्रेनोसिस और गंभीर कोरोनरी आर्टरी बीमारी के कारण अचानक कार्डियक डेथ का बड़ा खतरा होता, जबकि बिना इलाज वाला ब्रेस्ट कैंसर और भी एडवांस स्टेज तक बढ़ सकता था या शरीर के अन्य अंगों में फैल सकता था।"

शारदाकेयर हेल्थसिटी के सर्जिकल ऑन्‌कोलॉजी के सीनियर कंसलटेंट और यूनिट हेड, डॉ. हेमकांत वर्मा ने कहा, 'ऑन्कोलॉजी के नज़रिए से हमारा मुख्ख्झ लक्ष्झ यह सुनिश्चित करना था कि मरीज़ के ब्रेस्ट कैंसर का इलाज जल्द से जल्द हो और साथ ही इलाज में हाइएस्ट स्ट्रैण्हर्ड (सुरक्षा के उच्चतम मानकों) का पालन किया जाए। प्री-ऑपरेटिव जांच के दौरान हृदय की गंभीर असामान्यताओं का पता चलने का मतलब था कि हमें इलाज के तरीके पर पूरी तरह से पुनर्विचार करना पड़ा। केवल कैंसर की सर्जरी करने के बजाय एक मल्ट्रीडिसिप्लिनरी रणनीति विकसित की गई जिससे हम एक ही ऑपरेशन सेशन में स्वास्थ्य संबंधी सभी प्रमुख समस्याओं का समाधान कर सके। इस दृष्टिकोण ने न केवल कैंसर का समय पर इलाज संभव बनाया, बल्कि मरीज़ को कई बड़ी सर्जरी और रिकवरी के लंबे समय से भी बचाया। ऐसे मामले इंटीग्रेटेड कैंसर केयर के महत्व