पंजाबियों ने खराब से खराब परिस्थिति में भी सरकार के आगे कभी हाथ नहीं फैलाया : संजीव पूरी
नोएडा। पंजाबी समाज एक जागरुक समाज है। जिसने समय समय पर धर्म और देश के लिए अपना बलिदान दिया और भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है जिनमें लाला लाजपत राय, शहीद भगत सिंह, शहीद सुखदेव थापर, उधमसिंह, करतार सिंह सराभा , स्वामी श्रद्धानन्दऔर मदनलाल ढींगरा जैसे लोगों ने योगदान दिया। आज भी पंजाबियों का योगदान हर मंच में देखने को मिलेगा फिर चाहे 1971 की लड़ाई में पाकिस्तान के दो टुकड़े करवाए गए, बांग्लादेश को अलग किया गया, जिसमें मुख्य भूमिका जगजीत सिंह अरोड़ा जो की थी जो कि भारतीय सेना के तीन सितारा जनरल थे।
कारगिल युद्ध में शहीद हुए सौरभ कलिया, विजयंत थापर, विक्रम बत्रा जैसे 100 से अधिक पंजाबी मूल के लोगों ने शहादत दी।
खेल जगत में मिल्खा सिंह, कपिल देव,अभिनव बिन्द्रा, बलबीर सिंह सीनियर, विराट कोहली, युवराज सिंह,और परगट सिंह जैसे खिलाड़ियों ने भारत का नाम हमेशा रोशन किया।
इंडस्ट्री में कुलदीप सिंह ढींगरा (बर्जर ग्रुप) सुनील मित्तल (एयरटेल) बृजमोहन लाल मुंजाल ( हीरो ग्रुप), मोहन सिंह ओबेरॉय (ओबेरॉय ग्रुप) और विवेक चन्द्र सहगल (मदरसन ग्रुप) जैसे कई इंडस्ट्रियलिस्ट है सभी के नाम रखना मुमकिन नहीं है। जो भारत सरकार को एक अच्छा राजस्व देते हैं।
फिल्म इंडस्ट्री में केएल सहगल, पृथ्वीराज कपूर, देव आनंद, सुनील दत्त, दिलीप कुमार, राजकुमार, बलराज साहनी, प्राण, धर्मेन्द्र राजेश खन्ना, यश चोपड़ा, रणबीर कपूर,अक्षय कुमार और नरेन्द्र चंचल व गुरदासमान को कभी भूल नहीं सकते इनको हमेशा याद रखा जाएगा ये सभी लोग फिल्म इंडस्ट्री को एक मुकाम तक लेकर गए।
हर जगह पंजाबी छाए हुए हैं। राजनैतिक क्षेत्र में भी पंजाबियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा जैसे गुलजारी लाल नन्दा, मेहर चंद खन्ना, आई के गुजराल, सरदार मनमोहन सिंह, ज्ञानी जैल सिंह, बूटा सिंह, एचकेएल भगत, मदनलाल खुराना, विजय कुमार मल्होत्रा, अरुन जेटली, सुषमा स्वराज, शिला दीक्षित, अंबिका सोनी, सुरेश चन्द खन्ना, सतीश महानाजिनको अनदेखा नहीं किया जा सकता।
परन्तु पंजाबियों ने खराब से खराब परिस्थिति में भी सरकार के आगे कभी भी हाथ नहीं फैलाया और कभी भी आरक्षण नहीं मांगा।
आजादी के बाद पंजाबी लगातार कांग्रेस को वोट देते थे और कांग्रेस को पंजाबी सत्ता में बार बार लेकर आते थे।
परंतु जब पंजाबियों ने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा के साथ हुए तब से भाजपा भी लगातार सत्ता में आ रही है। परंतु अब भाजपा पंजाबियों की कदर नहीं कर रही। फिर चाहे यूजीसी का मामला हो या 2018 में एससी एसटी एक्ट को अध्यादेश ला करके मजबूत करना हो।
जब मदनलाल खुराना जी दिल्ली मुख्यमंत्री थे, उस समय गलत तरीके से मुख्यमंत्री पद से हटाया गया। मनोहर लाल खट्टर जी को हरियाणा से मुख्यमंत्री पद से हटाना या उत्तर प्रदेश में सुरेश कुमार खन्ना जो कि नौ बार से लगातार चुनाव जीत रहे हैं और सतीश महाना जी लगातार आठ बार चुनाव जीत रहे हैं। परंतु इनको अब तक मुख्य मंत्री नहीं बनाया गया।
नोएडा में जबकि अच्छी खासी संख्या पंजाबियों की है, तब भी अब तक नोएडा में कोई भी पंजाबी महानगर अध्यक्ष नहीं बना जबकि समाजवादी पार्टी और बसपा ने पंजाबी मूल के व्यक्ति को मौका दिया था।
अभी हाल ही में एक बहुत बड़ी घटना हुई थी जिसकी स्मृति सभी को याद होगी। कुछ समय पहले नोएडा की औद्योगिक नगरी में श्रमिकों के द्वारा वेतन बढ़ाए जाने के लिए आन्दोलन हुआ, जिस कारण 80% उद्योगों में तोड़फोड़ हुई।
जिसको सरकार ने अगले दिन मान भी लिया और मिनिमम वेतन वृद्धि कर दी गई परंतु यह मिनिमम वेतन वृद्धि सरकार को पहले से ही कर देनी चाहिए थी क्योंकि श्रमिकों के बारह वर्ष से वेतन नहीं बढ़ाए गए थे।
परंतु अब पंजाबी समाज ने ठान लिया है कि आने वाले चुनावों में पंजाबी बहुत सोच समझकर वोट देंगा। पंजाबी उस पार्टी को वोट देंगे जो पार्टी पंजाबियों के हित की बात करेंगी, जो पार्टी पंजाबियों को राजनीति ढांचे में लाएगी ,संगठन में पंजाबियों को मोका देगी। देश और प्रदेश स्तर में अधिक से अधिक पंजाबी एमएलए ,एमपी प्रत्याशी के लिए टिकट देगी। राजनीतिक दृष्टि से आगे बढ़ाएगी और जो पार्टी पंजाबियों के सुख दुख में साथ खड़ी रहेगी उसको पंजाबी वोट देगा।
अब कोई भी पार्टी पंजाबियों को अपना बंधुआ मज़दूर ना माने,पंजाबी जागरूक हो चुका है।पंजाबी अपना अच्छा बुरा भली भांति जान चुका है| आने वाले समय में उत्तरप्रदेश में भी पंजाबी मूल के ही हिंदू सिख अपने हितों के अनुसार ही वोट करेंगे|
साभार: संजीव पुरी (डिप्टी चेयरमैन) पंजाबी विकास मंच
पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष सेक्टर-56 ,नोएडा


