संस्कार की पाठशाला' से निकले राष्ट्र निर्माण के प्रहरी

संस्कार की पाठशाला' से निकले राष्ट्र निर्माण के प्रहरी

15 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का सांगठनिक शौर्य, योग और ओजस्वी घोष वादन के साथ हुआ भव्य समापन।

गाजियाबाद,; राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मेरठ प्रांत के तत्वावधान में स्थानीय दुर्गावती हेमराज सरस्वती विद्या मन्दिर में आयोजित 15 दिवसीय आवासीय संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) का आज वीवीआईपी नेहरू स्टेडियम, नेहरू नगर, गाजियाबाद में भव्य एवं ऐतिहासिक प्रकट समारोह के साथ सफलतापूर्वक समापन हो गया। गत 6 जून 2026 (ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी) से प्रारंभ हुए इस गहन प्रशिक्षण शिविर में मेरठ प्रांत के 28 संगठनात्मक क्षेत्रों से आए 518 शिक्षार्थियों ने 15 दिनों तक साधनारत रहकर कड़े अनुशासन, समयबद्धता और देश सेवा का मूलमंत्र सीखा। आज के इस प्रकट समारोह में हजारों की संख्या में पहुंचे आम नागरिकों, प्रबुद्ध जनों और मातृशक्ति के गगनभेदी जयकारों से पूरा स्टेडियम राष्ट्रभक्ति के अनूठे रंग में सराबोर हो उठा।

संस्कार की पाठशाला : सर्वांगीण विकास का केंद्र

वर्ग के अधिकारियों ने बताया कि यह 15 दिवसीय वर्ग वास्तव में 'संस्कार की पाठशाला' है, जहाँ शिक्षार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस शिविर में 'स्व' (स्वयं) से प्रारंभ होकर अनुशासन, कड़े शारीरिक अभ्यास, प्राणायाम और मानसिक दृढ़ता का पाठ पढ़ाया गया। वर्ग का मूल उद्देश्य केवल शारीरिक रूप से सुदृढ़ करना नहीं, बल्कि बौद्धिक सत्रों के माध्यम से स्वयंसेवकों के अंतर्मन में राष्ट्र प्रथम के भाव को स्थायी रूप से जाग्रत करना है। यहाँ देश के अलग-अलग कोनों से आए शिक्षार्थियों ने जाति, पंथ, भाषा और क्षेत्र के भेद को भुलाकर सामाजिक समरसता और एकात्मता के सूत्र को आत्मसात किया।

सांस्कृतिक व ऐतिहासिक गौरव गाथाओं से हुआ वैचारिक पोषण

इस प्रशिक्षण वर्ग की एक मुख्य विशेषता स्वयंसेवकों का बौद्धिक और वैचारिक पोषण रही। 15 दिनों के दौरान शिक्षार्थियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और ऐतिहासिक गौरव गाथाओं से अवगत कराया गया। छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह और महान स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन संघर्षों के माध्यम से स्वयंसेवकों को देश के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराया गया, ताकि वे वर्तमान की चुनौतियों का सामना करते हुए राष्ट्र के पुनरुत्थान में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।

शारीरिक कौशल और ओजस्वी घोष का अद्भुत सार्वजनिक प्रदर्शन

समापन समारोह के अवसर पर मैदान में उतरे सैकड़ों स्वयंसेवकों ने जब कदम-से-कदम मिलाकर पूर्ण समता (मार्च पास्ट) का प्रदर्शन किया, तो दर्शकों ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया। शिक्षार्थियों ने सामूहिक योग, प्राणायाम, निहत्थे आत्मरक्षा की प्राचीन भारतीय पद्धति नियुद्ध और दण्ड (लाठी) संचालन के विभिन्न कौशलों तथा विस्मयकारी व्यूह रचनाओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 107 शिक्षार्थियों के प्रांत घोष वर्ग (बैण्ड) का सामूहिक वादन रहा, जिसकी देशप्रेम की ओजस्वी सुर-लहरियों ने पूरे वातावरण में राष्ट्रभक्ति की ऊर्जा का संचार कर दिया।

मुख्य वक्ता का पाथेय (मार्गदर्शन)

समारोह के मुख्य वक्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक श्रीमान महेन्द्र जी ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा :

"संघ अपने शताब्दी वर्ष की यात्रा पूर्ण कर देश को परम वैभव पर ले जाने की साधना में निरंतर संलग्न है। संघ शिक्षा वर्ग का मूल उद्देश्य समाज के भीतर सोई हुई शक्ति को जगाकर राष्ट्र निर्माण के लिए चरित्रवान कार्यकर्ता तैयार करना है। जब समाज जाति, भाषा और संकीर्ण बंधनों से मुक्त होकर संगठित होगा, तभी भारत दुनिया का नेतृत्व कर सकेगा। यहाँ सीखे गए अनुशासन, सांस्कृतिक गौरव और 'राष्ट्र प्रथम' के भाव को प्रत्येक स्वयंसेवक अपने दैनिक जीवन में उतारे और समाज परिवर्तन का माध्यम बने।"

उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म और संस्कृति चिर पुरातन नित्य नूतन है। उच्चतम न्यायालय, भारतीय संसद, ओर सभी सेनाओं के ध्येय वाक्य संस्कृत में ही है और कुछ लोग हिंदू धर्म की बात करने पर सांप्रदायिकता की बात उठाने लगते हैं जो सर्वथा अनुचित है। संघ भी 100 वर्ष पूर्ण करने के बाद भी नित्य नूतन बना हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि जब भी विश्व को योग, शांति और सुशासन के मार्ग की आवश्यकता होती है उसे भागवत गीता की ओर देखना पड़ता है। छुआछूत, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण, स्व व नागरिक कर्तव्यों की बात करते हुए शताब्दी वर्ष में संघ द्वारा चलाये जा रहे पंच परिवर्तन अभियान को समाज से अपनाने का भी उन्होंने आग्रह किया।
 
मुख्य अतिथि (अध्यक्ष) का उद्बोधन

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल अनिल तिवारी जी (विशिष्ट सेवा मेडल, वायु सेवा मेडल) ने स्वयंसेवकों के अद्भुत अनुशासन की भूरि-भूरि सराहना की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा:

"एक सैनिक के रूप में मैंने सीमाओं पर कड़ा अनुशासन देखा है, लेकिन आज आम नागरिकों के बीच युवाओं के इस सांगठनिक अनुशासन और दृढ़ संकल्प को देखकर मेरा विश्वास और सुदृढ़ हो गया है। किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सेना के बल पर नहीं, बल्कि देश के भीतर रहने वाले नागरिकों के अनुशासित चरित्र और सजगता पर निर्भर करती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिस प्रकार युवाओं को संस्कारवान, मानसिक रूप से सुदृढ़ और देशप्रेमी बना रहा है, वह सराहनीय है और देश की वास्तविक सुरक्षा की रीढ़ है।"

28 संगठनात्मक क्षेत्रों का अनूठा प्रतिनिधित्व और सांख्यिकीय झलक

इस ऐतिहासिक वर्ग में मेरठ पूर्व, मेरठ पश्चिम, हापुड़, सरधना, मवाना, लक्ष्मीनगर, शामली, बागपत, सहारनपुर, बेहट, देवबंद, बिजनौर, धामपुर, रामपुर, मुरादाबाद, ठाकुरद्वारा, संभल, अमरोहा, बबराला, बुलंदशहर, खुर्जा, अनूपशहर, गौतमबुद्धनगर, नोएडा, गाजियाबाद महानगर, वैशाली, हरनंदी तथा गाजियाबाद जिला सहित कुल 28 सांगठनिक क्षेत्रों के 518 संघ शिक्षा वर्ग शिक्षार्थियों ने सहभागिता की। इस विशाल शिविर के सुचारू संचालन, आवास और भोजन व्यवस्था में 200 से अधिक कार्यकर्ता दिन-रात जुटे रहे।

कार्यक्रम के अंत में वर्ग के अधिकारियों ने शिविर को सुचारू रूप से संपन्न कराने में सहयोग देने वाले सभी स्थानीय नागरिकों, व्यवस्था कार्यकर्ताओं और विद्यालय प्रबंधन का हृदय से आभार व्यक्त किया। संपूर्ण स्टेडियम में स्वयंसेवकों और समाज से आये लगभग 5000 के जनसैलाब द्वारा एक साथ गाए गए 'संघ की प्रार्ना' के साथ इस ऐतिहासिक प्रकट समारोह का विधिवत समापन हुआ।

अभिषेक (प्रबंधन प्रमुख, संघ शिक्षा वर्ग) ने शिविर को सुचारू रूप से संपन्न कराने में सहयोग देने वाले सभी स्थानीय नागरिकों, व्यवस्था कार्यकर्ताओं और वीवीएस  प्रबंधन का हृदय से आभार व्यक्त किया।

इस गौरवमयी अवसर पर मुख्य रूप से नरेंद्र तनेजा (सह प्रांत संघचालक, पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र), धुरेंद्र (संघचालक, गाजियाबाद महानगर), तपन (सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख), अनिल (प्रांत प्रचारक, मेरठ प्रान्त), कृष्ण कुमार (प्रांत बौद्धिक प्रमुख), विनय कुमार (सहव्यवस्था), विजय गोयल (प्रांत संपर्क प्रमुख), सुरेन्द्र (प्रांत प्रचार प्रमुख),  देवेन्द्र प्रताप (गाजियाबाद विभाग कार्यवाह) तथा अतुल प्रकाश (गाजियाबाद विभाग प्रचारक) सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।

समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आई मातृशक्ति और दर्शक दीर्घा में मौजूद लगभग 5000 बंधु-भगनियों ने स्वयंसेवकों का मनोबल बढ़ाया। अंत में, संपूर्ण स्टेडियम में गूंजती स्वयंसेवकों और विशाल जनसैलाब की सामूहिक 'संघ प्रार्थना' के साथ इस ऐतिहासिक प्रकट समारोह का विधिवत समापन हुआ।