‘टीसीएस’, ‘एसबीआई’ के बाद ‘विप्रो’ में भी ‘कॉर्पोरेट जिहाद’!

‘टीसीएस’, ‘एसबीआई’ के बाद ‘विप्रो’ में भी ‘कॉर्पोरेट जिहाद’!

धर्मांतरण से इनकार करने पर ‘विप्रो’ कंपनी से हिंदू महिला कर्मचारी को नौकरी से निकाला; हिंदू जनजागृति समिति ने की कड़ी कार्रवाई की मांग!

पुणे : नासिक की ‘टीसीएस’ कंपनी में हुई चौंकाने वाली घटना और हाल ही में मुंबई के ‘एसबीआई’ बैंक का मामला अभी ताजा ही था कि अब पुणे के हिंजवड़ी स्थित प्रतिष्ठित कंपनी ‘विप्रो टेक्नोलॉजीज लिमिटेड’ में ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ और धार्मिक उत्पीड़न का एक बेहद गंभीर और आक्रोश पैदा करने वाला मामला सामने आया है। इस मामले में हिंजवड़ी पुलिस स्टेशन (पुणे) में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के पास शिकायत दर्ज कराई गई है। इस मामले की पीड़ित हिंदू महिला ने खुद पत्रकार वार्ता (प्रेस कॉन्फ्रेंस) में उपस्थित होकर इस पूरे घटनाक्रम का पर्दाफाश किया।

पीड़ित महिला कर्मचारी ने बताया कि "कंपनी में कार्यरत रहने के दौरान मुझ पर इस्लाम स्वीकार करने और एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से भारी मानसिक दबाव बनाया गया। इस धर्म-विरोधी और अनैतिक कृत्य को जब मैंने दृढ़ता से खारिज कर दिया और कंपनी प्रशासन से इसकी शिकायत की, तो कंपनी ने आरोपी पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा मुझे ही नौकरी से निकाल दिया।"

हिंदू जनजागृति समिति इस दमनकारी घटना की कड़े शब्दों में निंदा करती है। समिति के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्य के संगठनकर्ता श्री. सुनील घनवट ने पत्रकार वार्ता में कहा कि हिंदू जनजागृति समिति और पीड़ित महिला महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री. देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने, उच्च स्तरीय जांच का आदेश देने और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।

 पुणे के ‘श्रमिक पत्रकार भवन’ में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में मुख्य रूप से पीड़ित हिंदू महिला (पूर्व कर्मचारी, विप्रो कंपनी), श्री. पराग गोखले (पुणे जिला समन्वयक, हिंदू जनजागृति समिति), एडवोकेट श्री. विवेक भोसले (राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति, पुणे) अधिवक्ता गोपाल तेलंग और कु. क्रांति पेटकर (रणरागिणी शाखा) उपस्थित थे।

 इस घटना ने कॉर्पोरेट क्षेत्र में हिंदू महिलाओं की सुरक्षा और कंपनियों के आंतरिक प्रबंधन की पारदर्शिता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। पीड़ित महिला ने बताया कि* वह विप्रो कंपनी में पूरी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी कर रही थी।

हालांकि, कुछ समय पहले उसकी टीम की एक महिला सहकर्मी, शाहिना रफिक ने जानबूझकर उसके व्यक्तिगत जीवन में अनुचित हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया। शाहिना ने पीड़ित पर अपने परिचित ‘शेख’ नामक मुस्लिम व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाने और अपना मूल हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने के लिए अत्यधिक दबाव डाला। उसे लगातार यह प्रलोभन और लालच दिया जा रहा था कि ‘यदि तुम इस्लाम स्वीकार कर उस मुस्लिम व्यक्ति के साथ रहोगी, तो तुम्हें दुबई में बेहद ऐशो-आराम और शांति की जिंदगी मिलेगी।’ इस निरंतर धार्मिक और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर पीड़ित ने शाहिना से बात करना पूरी तरह बंद कर दिया और संपर्क को केवल आधिकारिक काम तक सीमित कर दिया।

 पीड़ित के अनुसार, इस बढ़ते उत्पीड़न की औपचारिक शिकायत उसने कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों (CDH Level) से की थी; लेकिन विप्रो प्रशासन ने आरोपी शाहिना रफिक के खिलाफ कोई दंडात्मक या प्रतिबंधात्मक कार्रवाई नहीं की। इसके विपरीत, जब पीड़ित ने शाहिना के व्यक्तिगत फोन कॉल का जवाब देना बंद कर दिया, तो शाहिना ने द्वेषवश पीड़ित की बातचीत को चुपके से रिकॉर्ड कर लिया और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पीड़ित के विरुद्ध ही कंपनी की लोकपाल समिति (Ombuds Process Team) में झूठी शिकायत दर्ज करा दी।

इस पूरे मामले में वरिष्ठ अधिकारी वसीम (ADH) ने भी खुलेआम शाहिना का पक्ष लिया और उस पर कार्रवाई करने से साफ इनकार कर दिया। इसके अलावा, विप्रो की एचआर और प्रबंधन समिति के सदस्य जीशान अहमद व अन्य सदस्यों ने पीड़ित का पक्ष, उसकी पिछली शिकायत और सबूतों को पूरी तरह से खारिज करते हुए एकतरफा कार्रवाई की।

 इस अन्याय की पराकाष्ठा अगस्त 2025 के अंत में हुई। एचआर प्रतिनिधि प्रशांत जी.आर. ने पीड़ित को एक ‘माइक्रोसॉफ्ट टीम्स’ मीटिंग के लिए बुलाया। उस मीटिंग के दौरान तकनीकी हथकंडों (Technical Tricks) का इस्तेमाल कर पीड़ित के लैपटॉप का स्क्रीन कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया और उसे बिना किसी पूर्व सूचना या सहमति के, जबरन उसी के सिस्टम से इस्तीफा (Resignation) सबमिट करने के लिए मजबूर किया। एडवोकेट भोसले ने इस अवसर पर कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना के, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को ताक पर रखकर और जांच के बाद अपना पक्ष रखने का कानूनी अवसर दिए बिना इस तरह जबरन इस्तीफा लेना भारतीय श्रम एवं श्रम कानूनों का सीधा उल्लंघन है।

न्याय के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे के साथ विप्रो प्रशासन को कानूनी नोटिस!

 इस संस्थागत अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ पीड़ित महिला ने अपने वकीलों के माध्यम से विप्रो प्रशासन को एक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजा है। इस नोटिस में मुख्य मांग की गई है कि ‘दबाव और जबरदस्ती में लिया गया इस्तीफा कानूनन अवैध है, इसलिए इसे तुरंत रद्द किया जाए और पीड़ित को पूरे वेतन तथा सेवा की निरंतरता (Service Continuity) के साथ सम्मानपूर्वक नौकरी पर बहाल किया जाए।’ इसके अलावा, पीड़ित को हुई अत्यधिक मानसिक प्रताड़ना, सामाजिक प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान के एवज में 50 लाख रुपये का वित्तीय मुआवजा देने, कंपनी द्वारा आधिकारिक लिखित माफी मांगने और मुख्य संदिग्ध शाहिना रफिक सहित उसे संरक्षण देने वाले दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई है। पीड़ित महिला ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनी अगले 15 दिनों में उचित कदम नहीं उठाती है, तो वह विप्रो के विरुद्ध सिविल, क्रिमिनल और लेबर कोर्ट में सीधे मुकदमा दर्ज करेगी।

पुणे के आईटी क्षेत्र में हिंदू विरोधी एजेंडा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा!

 इस अवसर पर हिंदू जनजागृति समिति के श्री. सुनील घनवट ने कहा कि* हिंदू जनजागृति समिति अब पीड़ित हिंदू महिला को न्याय दिलाने के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतर चुकी है। नासिक की टीसीएस कंपनी की घटना के बाद पुणे की आईटी कंपनी में सामने आया यह मामला एक सुनियोजित ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ का हिस्सा है।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) में उच्च पदों पर बैठकर हिंदू महिलाओं की धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को दबाने का यह प्रयास बेहद चिंताजनक है। यह कोई एकलौता मामला नहीं है, बल्कि ऐसी और भी घटनाएं होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पुणे के आईटी क्षेत्र में इस तरह का हिंदू-विरोधी एजेंडा और उत्पीड़न किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।

सरकार को व्यापक स्तर पर जांच करनी चाहिए कि क्या अन्य बड़ी कंपनियों में भी ऐसी चीजें हो रही हैं। उन्होंने अपील की कि *यदि किसी भी हिंदू महिला पर इस तरह का अन्याय, धार्मिक उत्पीड़न या धर्मांतरण का दबाव बनाया जा रहा है, तो वे बिना डरे हिंदू जनजागृति समिति के हेल्पलाइन नंबर 7738233333 पर संपर्क करें।