‘डोंट मिस अ बीट’: कम उम्र से ही हृदय स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी

‘डोंट मिस अ बीट’: कम उम्र से ही हृदय स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी

नोएडा। विश्व हृदय दिवस के अवसर पर कम उम्र के लोगों में हृदय संबंधी जोखिम कारकों के बढ़ते मामलों ने समय रहते जागरूकता और बचाव की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है। आमतौर पर हृदय रोग को बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अब 30 और 40 वर्ष की उम्र के लोगों में भी उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और अन्य जोखिम कारक तेजी से देखने को मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चेतावनी संकेतों को पहचानना, समय पर स्वास्थ्य जांच कराना और जीवनशैली से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करना हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ‘डोंट मिस अ बीट’  थीम संभावित जोखिमों को समय रहते पहचानने और लक्षण गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने के महत्व को रेखांकित करती है।

डॉ. कृष्ण यादव, सीनियर कंसल्टेंट एवं एच ओ डी – कार्डियोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन  ने कहा कि “हृदय रोग अब कम उम्र के लोगों में भी तेजी से चिंता का विषय बन रहा है। हमें लक्षणों के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय समय रहते अपने हृदय के स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। मेरी ओपीडी में 30–40 वर्ष की उम्र के मरीजों में हृदय संबंधी समस्याएं और उनसे जुड़े जोखिम कारक आम तौर पर देखने को मिल रहे हैं।

हृदय संबंधी समस्याओं वाले मरीजों में लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं और 70 प्रतिशत पुरुष हैं। उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, अस्वास्थ्यकर खान-पान और लंबे समय तक रहने वाला तनाव अक्सर एक साथ देखने को मिलता है। कई हृदय संबंधी जोखिम कारकों के शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है। सीने में लगातार भारीपन या जकड़न, सांस लेने में परेशानी, ज्यादा पसीना आना, अचानक कमजोरी या दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक जाना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस विश्व हृदय दिवस पर ‘डोंट मिस अ बीट’ का संदेश है कि अपने जोखिमों को पहचानें, चेतावनी संकेतों को समझें और बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लें।”

डॉ. दीपांकर वत्स, सीनियर कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा, ओमेगा-1  ने कहा कि “हृदय स्वास्थ्य अब केवल बुजुर्गों तक सीमित चिंता नहीं रह गई है। हमारी ओपीडी में हर महीने करीब 75–80 मरीज, जिनमें वयस्क और बच्चे दोनों शामिल हैं, आते हैं। इनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट फेल्योर जैसी समस्याओं के साथ-साथ बच्चों में जन्मजात हृदय संबंधी समस्याओं के मामले भी सामने आते हैं।

हालांकि हृदय रोग आमतौर पर *45–50 वर्ष की उम्र के बाद अधिक देखने को मिलता है,* लेकिन अब कम उम्र के वयस्कों में भी हृदय रोग के जोखिम बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। इसके पीछे निष्क्रिय जीवनशैली, मोटापा, तनाव, नींद की कमी, अस्वास्थ्यकर खान-पान और धूम्रपान जैसे कारण प्रमुख हैं। सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, ज्यादा पसीना आना, चक्कर या अचानक कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या परिवार में हृदय रोग का इतिहास रखने वाले लोगों के लिए नियमित जांच भी जरूरी है। इस विश्व हृदय दिवस पर *“डोंट मिस अ बीट”* का संदेश है कि लक्षणों को समय पर पहचानें, तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें और हर उम्र में अपने हृदय को स्वस्थ रखने की आदत अपनाएं।”

डॉ. चंद्रशेखर, वाइस चेयरमैन एवं एचओडी – कार्डियोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन, नई दिल्ली ने कहा कि “हमारी कार्डियोलॉजी ओपीडी में हर महीने लगभग 500 हृदय रोगी आते हैं। हम आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, सीने में दर्द, हृदय की धड़कन से जुड़ी समस्याएं और हार्ट फेलियर के मरीज देखते हैं। इसके प्रमुख जोखिम कारकों में डायबिटीज, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता, अस्वस्थ खान-पान और लंबे समय तक रहने वाला तनाव शामिल हैं।

उम्र बढ़ने के साथ हृदय संबंधी बीमारियां अधिक आम होती हैं, लेकिन अब हम कम उम्र के वयस्कों, खासकर 30 और 40 की उम्र के लोगों में भी हृदय रोग और इससे जुड़े जोखिम कारक तेजी से देख रहे हैं। हमारी ओपीडी में लगभग 60% पुरुष और 40% महिला हृदय रोगी हैं, जबकि महिलाओं में मेनोपॉज के बाद हृदय संबंधी जोखिम विशेष रूप से बढ़ जाता है। हृदय स्वास्थ्य को केवल 50 वर्ष की आयु के बाद चिंता का विषय नहीं माना जाना चाहिए। हर महीने लगभग 500 मरीजों के आने के साथ, नियमित हृदय संबंधी जांच, बचाव और समय पर चिकित्सकीय परामर्श बेहद जरूरी है, विशेष रूप से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग की पारिवारिक हिस्ट्री वाले लोगों के लिए।”

डॉ. पंकज रंजन, सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी - कार्डियोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने कहा कि “विश्व हृदय दिवस पर ‘एक भी धड़कन न चूकें’ की थीम हमें याद दिलाती है कि हर उम्र में हृदय स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है। हमारे ओपीडी में हर महीने लगभग 700* हृदय संबंधी मरीज आते हैं, जिनमें लगभग 65% पुरुष और 35% महिला मरीज होते हैं। हालांकि हृदय संबंधी समस्याएं आमतौर पर अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलती हैं, लेकिन अब हम कम उम्र के मरीजों में भी तेजी से हृदय संबंधी चिंताओं और जोखिम कारकों का सामना कर रहे हैं, जिनमें 30 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष और 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं शामिल हैं।

एक उल्लेखनीय मामले में एक 23 वर्षीय युवा को बिना किसी स्पष्ट पारंपरिक जोखिम कारक के बावजूद हृदय संबंधी समस्या हो गई। यह इस बात को दर्शाता है कि केवल उम्र को हृदय रोग से सुरक्षा का आधार नहीं माना जा सकता। लोगों को सीने में तकलीफ, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना या असामान्य थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच, शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, धूम्रपान से बचना और तनाव का प्रबंधन हृदय स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं। *लिसन टू योर हार्ट एंड डोंट मिस अ बीट।*

आज जब अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों में हृदय संबंधी चिंताएं सामने आ रही हैं, विश्व हृदय दिवस यह याद दिलाने का महत्वपूर्ण अवसर है कि हृदय स्वास्थ्य जीवनभर ध्यान देने का विषय है। स्वस्थ दैनिक आदतों को अपनाकर, महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों की नियमित निगरानी करके और चेतावनी संकेतों पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेकर लोग अपने हृदय स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल कर सकते हैं। इस *विश्व हृदय दिवस* पर संदेश स्पष्ट है—अपने जोखिमों को जानें, अपने शरीर के संकेतों को समझें, समय रहते कदम उठाएं और *‘डोंट मिस अ बीट* ’ यानी *अपने दिल की धड़कन को नजरअंदाज न करें* ।