एमिटी में कुशल एवं स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली के लिए स्मार्ट प्रौद्योगिकियां पर शिक्षक विकास कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

एमिटी में कुशल एवं स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली के लिए स्मार्ट प्रौद्योगिकियां पर शिक्षक विकास कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

नोएडा। एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ एनवांयरमेंटल सांइसेस और एमिटी एकेडमिक स्टाफ कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में गुरू दक्षता फैकल्टी इंडक्शन कार्यक्रम के अंर्तगत शिक्षकों एवं शोधार्थियों के लिए ‘‘कुशल एवं स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली के लिए स्मार्ट प्रौद्योगिकियां’’ विषय पांच दिवसीय शिक्षक विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

03 से 07 जून तक चलने वाले इस शिक्षक विकास कार्यक्रम का शुभारंभ भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के अंर्तराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय सहयोग विभाग के प्रमुख एवं नीति, योजना सहित रणनीतिक प्रबंधन के प्रोफेसर डा अनिल कुमार गुप्ता, नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ अरबन अफेयर के संसाधन एवं अपशिष्ट विभाग की प्रमुख डा पारोमिता डे, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला, एमिटी लॉ स्कूल के चेयरमैन डा डी के बंधोपाध्याय और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ एनवांयरमेंटल सांइसेस की सहायक निदेशक डा रेनू धूप्पर द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में दिल्ली एनसीआर के विभिन्न संस्थानों सहित एमिटी के विभिन्न विश्वविद्यालयो ंसे 32 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है।

भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के अंर्तराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय सहयोग विभाग के प्रमुख एवं नीति, योजना सहित रणनीतिक प्रबंधन के प्रोफेसर डा अनिल कुमार गुप्ता ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भूमि, अपशिष्ट प्रबंधन से सीधे जुड़े हुई है क्योकी अधिकतर वस्तुयें जिनका उपयोग नही होता उनका निपटान भूमि पर ही होता है। हमे ंभविष्य की चुनौतियों के लिए नई प्रौद्योगिकियों को विकसित करना होगा। उन्होनें चुनौतियों को बताते हुए कहा कि हमें केवल कचरे के पहाड़ों का निस्तारण ही नही करना बल्कि उसके पर्यावरण प्रभाव को भी समझना होगा। जो पर्यावरणीय नुकसान हुआ है उसे रोकने व उसकी भरपाई के लिए तकनीकी का विकास आवश्यक है।

उर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन एक दूसरे से जुड़े है क्योकी अपशिष्ट प्रबंधन में काफी उर्जा का उपयोग होता है इसलिए इस प्रकार की प्रौद्योगिकियों को विकसित करें जो उर्जा की खपत कम करें। वर्तमान में प्राकृतिक उर्जा जैसे सौर उर्जा, वायु उर्जा का उपयोग, किसी बड़ी आपदा के समय सारे प्रदूषित तत्व आपस में मिल जाते है उसके लिए योजना का निर्माण करना होगा। डा गुप्ता ने कहा कि दो परिदृश्य एक साथ दिख रहे है एक तरफ पानी की बर्बादी और दूसरी ओर पानी की कमी। आने वाली सभ्यता अपशिष्ट पुनस्थापित की सभ्यता होगी किंतु वर्तमान में वृतीय अर्थव्यस्था भी समस्या का निवारण नही कर सकती। उन्होनें कहा कि इस प्रकार के शिक्षक विकास कार्यक्रम आपको संयुक्त रूप से समस्या का स्थायी निवारण प्राप्त करने में सहायक होगे।

नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ अरबन अफेयर के संसाधन एवं अपशिष्ट विभाग की प्रमुख डा पारोमिता डे ने कहा कि नीति को क्रियान्वयन के रूप में करना सबसे महत्वपूर्ण है। क्षमता को बढ़ाकर और वस्तुओं का पुर्नउपयोग के साथ नई तकनीक का उपयोग कर हम लक्ष्य को हासिल कर सकते है। केवल डाटा का संकलन ही आवश्यक नही बल्कि उसका विश्लेषण करके रणनीति का निर्माण करना होगा। वर्तमान में भारत, गुणवत्ता पूर्ण और वैध डाटा की कमी से जुझ रहा है इसलिए सही डाटा होना बेहद महत्वपूर्ण है। डा डे ने कहा कि नवीनतम प्रौद्योगिकियों के साथ विकसित की तकनीकी चुनौतियों का निवारण कर सकती है। उन्होनें इस अवसर पर जागरूकता एवं शिक्षण सहित सभी के लिए मानक दिशानिर्देश लागू करने पर जोर भी दिया।

एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला ने कहा कि छात्रों को नवीनतम जानकारी प्रदान करने के लिए आवश्यक है कि शिक्षक समय समय पर शोध, नवचार सहित आधुनिक जानकारियों से स्वय को अपडेट रखे। अपशिष्ट प्रबंधन का सबसे बेहतरीन तरीका उसके निराकरण को खोजना है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें समस्याओं के पर्यावरणीय आधारित स्थायी समाधान को प्राप्त करना होगा। वर्तमान में बढ़ रहे कचरे के पहाड़ो ंने जल एवं वायु को प्रदूषित कर दिया है इसलिए युवा तकनीकी मस्तिष्को को इस समस्या का हल खोजने के लिए प्रेरित करना होगा।

एमिटी लॉ स्कूल के चेयरमैन डा डी के बंधोपाध्याय ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम वर्तमान समय की मांग है और यह पांच दिवसीय कार्यक्रम आपको शिक्षण का बेहतरीन अनुभव प्रदान करेगा। संयुक्त शोध कार्य करने के अवसर पर विचार करें जिससे इस समाज व देश के लोग लाभांवित हो सके। डा बंधोपाध्याय ने कहा कि कचरे का प्रबंधन ना होने पर वो मनुष्य के स्वास्थय, पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधानो को प्रभावित करता है। वर्तमान में लगभग 80 प्रतिशत वैश्विक कचरे को भूमि पर फेंका जाता है, उर्जा और सामग्री पुनर्प्राप्ति के लिए अपशिष्ट धाराओ का उपयोग किया जा सकता है।

एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ एनवांयरमेंटल सांइसेस की सहायक निदेशक डा रेनू धूप्पर ने अतिथियो एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस शिक्षक विकास कार्यक्रम वैश्विक समस्या जैसे अपशिष्ट प्रबंधन एवं प्रदूषण के निराकरण हेतु स्मार्ट तकनीकी आदि पर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की जायेगी।

तकनीकी सत्र के अंर्तगत आज दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो चिराश्री घोष, आईएआरआई दिल्ली के प्रिसिंपल वैज्ञानिक डा भूपिंद्र सिंह ने अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियां और अवसर को समझना विषय पर व्याख्यान दिया।

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