एक हादसा और जिंदगीभर की चुनौती: स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के बाद मरीजों को किन समस्याओं से गुजरना पड़ता है? - डॉ. जयश्री
5 सितंबर को विश्व स्पाइनल कॉर्ड इंजरी (SCI) दिवस मनाया जाता है। एक सड़क हादसा, छत से गिरना या निर्माण स्थल पर हुई छोटी सी चूक किसी स्वस्थ व्यक्ति की जिंदगी को पलभर में बदल सकती है। रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट व्यक्ति को जीवनभर के लिए व्हीलचेयर पर निर्भर बना सकती है।
स्पाइनल कॉर्ड इंजरी आज केवल एक चिकित्सा समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और मानसिक चुनौती भी बन चुकी है। वैश्विक स्तर पर लाखों लोग इस स्थिति के साथ जीवन जी रहे हैं। भारत में भी हर वर्ष हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं और ऊंचाई से गिरने के कारण स्पाइनल कॉर्ड इंजरी का शिकार होते हैं। इनमें बड़ी संख्या युवाओं और कामकाजी उम्र के लोगों की होती है।

भारत में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के प्रमुख कारणों में ऊंचाई से गिरना और सड़क दुर्घटनाएं शामिल हैं। निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा बेल्ट का इस्तेमाल न करना, बिना रेलिंग वाली छतों से गिरना, पेड़ों से गिरना तथा तेज रफ्तार बाइक दुर्घटनाएं इसके प्रमुख कारण हैं।
बुजुर्गों में सामान्य रूप से फिसलकर गिरना भी गंभीर रीढ़ की चोट का कारण बन सकता है।

व्हीलचेयर पर जिंदगी की असली चुनौतियां: स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के बाद मरीज की चुनौती केवल अस्पताल या इलाज तक सीमित नहीं रहती। असली संघर्ष घर लौटने के बाद शुरू होता है।
डॉ. जयश्री, फाउंडर, हनुमत कृपा फाउंडेशन, जो स्पाइनल कॉर्ड इंजरी और व्हीलचेयर उपयोग करने वाले मरीजों के साथ कार्य करती हैं, बताती हैं कि रोजमर्रा की जिंदगी में इन मरीजों को शारीरिक समस्याओं के साथ-साथ समाज और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
यात्रा करना व्हीलचेयर उपयोग करने वाले व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। कई मरीज आज भी घर के सदस्यों पर पूरी तरह निर्भर हैं। सार्वजनिक परिवहन और सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांग-अनुकूल सुविधाओं की कमी उनकी स्वतंत्रता को प्रभावित करती है।
मेट्रो जैसी सुविधाओं में भी कई बार व्हीलचेयर उपयोग करने वाले व्यक्ति को लोगों की असंवेदनशीलता का सामना करना पड़ता है। लिफ्ट का उपयोग करने के दौरान लोग इंतजार करने से बचते हैं। बस यात्रा के दौरान कई मरीजों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। वहीं कई बार कैब चालक व्हीलचेयर रखने के कारण गाड़ी खराब होने का बहाना बनाकर बुकिंग तक रद्द कर देते हैं।
शरीर की परेशानी सिर्फ लकवे तक सीमित नहीं:
स्पाइनल कॉर्ड इंजरी के मरीजों को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से भी गुजरना पड़ता है। शरीर के प्रभावित हिस्से में संवेदना खत्म हो सकती है, जिससे चोट या जलने का पता तक नहीं चलता। रक्तचाप और रक्त संचार से जुड़ी समस्याएं, मांसपेशियों की कमजोरी, मूत्र एवं मल नियंत्रण की समस्या और लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने के कारण बेड सोर्स जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
गर्दन के पास चोट लगने पर हाथ और पैर दोनों प्रभावित हो सकते हैं, जिसे क्वाड्रिप्लेजिया कहा जाता है। वहीं कमर या पीठ के हिस्से में चोट लगने पर शरीर का निचला हिस्सा प्रभावित हो सकता है, जिसे पैराप्लेजिया कहा जाता है।
हादसे के बाद एक गलत कदम बढ़ा सकता है नुकसान:
दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को बचाने की जल्दबाजी में लोग अक्सर उसे पकड़कर बैठा देते हैं, खींचते हैं या हाथ-पैर पकड़कर वाहन में डाल देते हैं। यदि रीढ़ की हड्डी में चोट हो, तो यह गलत तरीके से किया गया मूवमेंट चोट को और गंभीर बना सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क दुर्घटना या ऊंचाई से गिरने के बाद यदि व्यक्ति को गर्दन या पीठ में तेज दर्द, हाथ-पैरों में कमजोरी या सुन्नपन, झुनझुनी अथवा सांस लेने में परेशानी हो तो स्पाइनल कॉर्ड इंजरी की संभावना को गंभीरता से लेना चाहिए।
ऐसी स्थिति में घायल व्यक्ति की गर्दन और रीढ़ को अनावश्यक रूप से नहीं हिलाना चाहिए। उसे बैठाने या खड़ा करने की कोशिश न करें। प्रशिक्षित चिकित्सा सहायता मिलने तक शरीर को जितना संभव हो स्थिर रखें और एम्बुलेंस या उचित चिकित्सा सुविधा की मदद से अस्पताल पहुंचाएं।
बचाव से बच सकती है जिंदगीभर की विकलांगता:
सपाइनल कॉर्ड इंजरी से बचाव के लिए सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है।
बाइक और स्कूटर चलाते समय हेलमेट का उपयोग करें।
निर्माण स्थलों पर सुरक्षा बेल्ट और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य हों।
छतों पर मजबूत रेलिंग लगाई जाए।
बुजुर्गों के घर में फिसलन रोकने वाले उपाय और बाथरूम में ग्रैब बार लगाए जाएं।
दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को गलत तरीके से उठाने से बचें।
सार्वजनिक परिवहन और भवनों को व्हीलचेयर उपयोग करने वालों के लिए अधिक सुगम बनाया जाए।
विश्व स्पाइनल कॉर्ड इंजरी दिवस केवल बीमारी के प्रति जागरूकता का दिन नहीं है, बल्कि यह हमें सुरक्षा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का संदेश देता है। एक छोटी सी सावधानी किसी व्यक्ति को जीवनभर की व्हीलचेयर निर्भरता से बचा सकती है। वहीं समाज की थोड़ी सी संवेदनशीलता उन लोगों की जिंदगी को आसान बना सकती है, जो हर दिन अपनी परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
साभार: डॉ. जयश्री
फिजियोथेरेपी एवं न्यूरो रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञ


