संगीत मेरे लिए साधना है, प्रसिद्धि नहीं : डॉ. बबीता शर्मा

संगीत मेरे लिए साधना है, प्रसिद्धि नहीं : डॉ. बबीता शर्मा

‘बाग़बान’ की सफलता पर मीडिया संवाद एवं दिवाली मिलन समारोह

नोएडा । भक्ति संगीत और समाजसेवा की जगमगाती आवाज़ डॉ. बबीता शर्मा ने रविवार को नोएडा सेक्टर-50 स्थित अपने निवास पर आयोजित मीडिया संवाद एवं दिवाली मिलन समारोह में कहा कि “संगीत मेरे लिए साधना है, प्रसिद्धि नहीं।” बाग़बान’ कार्यक्रम की अभूतपूर्व सफलता के उपलक्ष्य में आयोजित इस अवसर पर डॉ. शर्मा ने अपने जीवन की प्रेरणादायक यात्रा और सामाजिक कार्यों पर प्रकाश डाला।

सेक्टर-50 स्थित अपने घर में वे पति, पुत्र उत्कर्ष और बहू के साथ सुखद पारिवारिक जीवन जी रही हैं, परंतु उनका हृदय अब भी सेवा, संगीत और संवेदना के लिए समर्पित है।

संगीत और संस्कार की जड़ें अलवर से

डॉ. बबीता शर्मा का जन्म अलवर के एक संयुक्त परिवार में हुआ, जहाँ रामचरितमानस की ध्वनि और भक्ति संगीत के सुर बचपन से ही उनके जीवन का हिस्सा रहे। उनके बाबा और चाचा प्रसिद्ध मानसगायक रहे, और इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए डॉ. बबीता ने अलवर से स्नातक और जयपुर विश्वविद्यालय से संगीत में उच्च शिक्षा प्राप्त की।

महान गायक संगीत सम्राट पं. भीमसेन जोशी उनके शोध का विषय रहे।
उसी पर उन्होंने अपना डॉक्टरेट शोध पूरा किया, जो उनके समर्पण और साधना का प्रमाण है।

संगीत का पुनर्जन्म — पुत्र की प्रेरणा से

विवाह और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण कुछ वर्षों तक संगीत पीछे रह गया। किन्तु उनके पुत्र उत्कर्ष शर्मा के एक सरल प्रश्न “माँ, आपका स्वर इतना मधुर है...

आपने संगीत क्यों छोड़ दिया?” ने उनके भीतर के कलाकार को पुनः जागृत कर दिया। यही वह क्षण था जब डॉ. बबीता ने निश्चय किया कि संगीत उनके जीवन का साधना मार्ग बनेगा।

नोएडा बनी कर्मभूमि

नोएडा में उन्होंने सबसे पहले सेक्टर-19 के सनातन धर्म सभा मंदिर में सुंदरकांड का गायन किया, इस प्रस्तुति की अपार सफलता के बाद उनका संगीत सफर फिर से शुरू हुआ। टी.एन. गोविल, संजय बाली, विपिन मलहन, मान सिंह चौहान, वीरेश तिवारी, किरण बंसल, संजय गोयल और राजीव गर्ग जैसे संगीत प्रेमियों ने उनके प्रयासों को नई दिशा दी, आज डॉ. बबीता शर्मा नोएडा और दिल्ली में भक्ति संगीत की एक सशक्त पहचान बन चुकी हैं।

संगीत से समाजसेवा तक
स्थिरता प्राप्त होने के बाद उन्होंने अपने संगीत को सेवा का माध्यम बनाया।

उनकी प्रमुख सामाजिक सेवाएँ हैं:

गौ-सेवा: दिल्ली और नोएडा की गौशालाओं में नियमित सहयोग, ‌पक्षी संरक्षण: प्रतिदिन पक्षियों को दाना डालना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है, बाल शिक्षा सहायता: आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा का संपूर्ण दायित्व, महिला सशक्तिकरण: संगीत प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना। वरिष्ठ नागरिक सेवा: बुज़ुर्गों के लिए प्रेरणादायी मंच ‘बाग़बान’ का आयोजन। पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के प्रति उनके गहरे लगाव का प्रमाण है सवा लाख पौधे लगाने का संकल्प, जिस पर वे निरंतर कार्यरत हैं, उनका मानना है कि “हर पौधा एक जीवित प्रार्थना है, जो धरती को जीवन देता है।”

बाग़बान’ — बुज़ुर्गों को स्नेह और सम्मान का मंच

वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान हेतु शुरू किया गया कार्यक्रम ‘बाग़बान’ आज नोएडा की एक पहचान बन चुका है, इस आयोजन के माध्यम से डॉ. शर्मा न केवल बुज़ुर्गों को स्नेह और सम्मान का वातावरण देती हैं, बल्कि संगीत के माध्यम से उनके जीवन में नई ऊर्जा भरती हैं।

समरसता का स्वर

डॉ. बबीता शर्मा आज केवल एक गायिका नहीं, बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी और पर्यावरणप्रेमी के रूप में भी जानी जाती हैं।
वे संगीत, समाज और प्रकृति — तीनों के बीच एक सेतु का कार्य कर रही हैं। उनके प्रयास इस संदेश को साकार करते हैं कि “अगर स्वर सच्चा है, तो जीवन में कभी देर नहीं होती।”

अंतिम सुर

जहाँ से डॉ. बबीता शर्मा का स्वर उठता है, वहाँ से करुणा, भक्ति और हरियाली झरती है, उनका जीवन इस सत्य का साक्षी है कि संगीत केवल सुना नहीं जाता, जिया जाता है।

दिवाली मिलन के अवसर पर उन्होंने कहा कि “यह सफलता मेरी नहीं, उन सबकी है जिन्होंने मुझे प्रेम, विश्वास और सहयोग दिया।”