"कथा संवाद" में डॉ. निधि अग्रवाल की कहानी को मिला पहला "दीप स्मृति कथा सम्मान"

"कथा संवाद" में डॉ. निधि अग्रवाल की कहानी को मिला पहला "दीप स्मृति कथा सम्मान"

संवाददाता...

 गाजियाबाद।‌ मीडिया 360 लिट्रेरी फाउंडेशन के "कथा संवाद" की अध्यक्षता करते हुए विख्यात लेखक सूरज प्रकाश ने कहा कि ऐसे आयोजन हमें साहित्यिक के भविष्य के प्रति आश्वस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि कहानी की पाठशाला में सुनीं गई  कहानियां अलग-अलग परिवेश का प्रतिनिधित्व करती हैं। अपनी बोध कथाओं के जरिए उन्होंने आम आदमी के दैनिक जीवन में जबरन घुसपैठ कर रहे बाजारवाद व सियासत की नए तरीके से व्याख्या करते हुए सतर्क रहने की नसीहत दी।

 होटल रेडबरी में आयोजित "कथा संवाद" में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार आशीष कंधवे ने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्य की संजीवनी हैं। भविष्य के रेणु और प्रेमचंद यहीं से निकलेंगे। लेकिन लेखकों को ध्यान रखना चाहिए कि बड़ा रचनाकार वह होता है जो जानता है कि क्या नहीं लिखा जाना चाहिए। लेखन के प्रति मोह या आत्ममुग्धता लेखन और लेखक दोनों को ही कमजोर करती है। उन्होंने कहा कि समाज में वही कहानियां जीवित रहती हैं जो लोकरंजन के साथ लोकमंगल की भूमिका भी निभाती हैं।

"कथा संवाद" में शकील अहमद की कहानी "करामाती जिन्नात", डॉ. पूनम सिंह की कहानी "मत लौटना अगनपाखी", रवींद्रकांत त्यागी की शीर्षक विहीन कहानी और संस्था के अध्यक्ष शिवराज सिंह के कथानक "यज्ञ" पर विमर्श हुआ। 'यज्ञ' की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कथा में रामदास, गाय, गांव और पंचायत का वर्णन बताता है कि प्रौढ़ अवस्था के नए लेखक अपनी जड़ों से अभी कटे नहीं हैं। सत्य नारायण शर्मा ने रवींद्र कांत त्यागी की कहानी पर बोलते हुए कहा कि साहित्य में गणिका का दखल आदिकाल से चला आ रहा है। गणिका को केंद्र में रखकर लिखी गई कहानी के स्वाभाविक व कृत्रिम अंत को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि कहानी की दिशा समाज की स्वीकृत अवधारणाओं से ही तय होनी चाहिए।
  पूनम सिंह की कहानी पर चर्चा करते हुए सूरज प्रकाश ने कहा कि मौजूदा परिवेश में प्रेम को लेकर संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई है। नौबत कपड़े की तरह प्रेमी बदलने तक जा पहुंची है। यह कहानी वैवाहिक जीवन में लुप्त होते प्रेम या विवाहेत्तर संबंधों पर आधारित एक सशक्त रचना है।

व्यंग्यकार सुभाष चंदर ने कहा कि यह आयोजन नवांकुरों को लेखन के प्रति और नई पीढ़ी को पढ़ने के लिए प्रेरित करने का माध्यम है। आप क्या लिख रहे हैं यह मायने नहीं रखता महत्वपूर्ण यह है कि आप पढ़ कितना रहे हैं और क्या पढ़ रहे हैं? आलोक यात्री ने कहा कि दरक रहे वैवाहिक रिश्तों पर आधारित कथा "मत लौटना आंगन पाखी" जहां प्रेमचंद की कहानी "सोहाग का शव" याद दिलाती है वहीं अझेय या निर्मल वर्मा की कहानियों की कतार में खड़ी नजर आती है लेकिन लंबी कहानियों के लिए कार्यशाला जैसे आयोजन उपयुक्त मंच नहीं हैं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि अशोक मैत्रेय ने कहा कि एक छत के नीचे इतनी कहानियां सुनना और उन पर चर्चा करना लेखन की सेहत सुधारने के साथ एक बड़े वर्ग को मानसिक पोषण भी प्रदान करता है।

कार्यक्रम का संचालन रिंकल ने किया। इस अवसर पर पूर्व कथा संवाद में सुनाई गई डॉ. निधि अग्रवाल की कहानी "होलोकास्ट'' को प्रथम "दीप स्मृति कथा सम्मान" स्वरूप 11 सौ रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। अद्विक प्रकाशन के निदेशक अशोक गुप्ता ने घोषणा की कि कथा संवाद में भविष्य में सुनाई जाने वाली महिला रचनाकार की श्रेष्ठ कृति को भी प्रति माह 11 सौ रुपए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस अवसर पर अद्विक प्रकाशन  की ओर से पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया जाना इसलिए सुखद रहा कि कई पुस्तक प्रेमियों को उचित दाम पर मनपसंद पुस्तकें उपलब्ध हो गईं।

विमर्श में डॉ. अजय गोयल, सिनीवाली शर्मा, तेजवीर सिंह, डॉ. प्रीति कौशिक, अनिल शर्मा, डॉ. संजय शर्मा, सुशील शर्मा, सुधीर राणा, अक्षयवरनाथ श्रीवास्तव, देवेन्द्र देव, डॉ. मोहम्मद मुस्तरिम, पवन जैन आदि ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर डॉ. जकी तारिक, मधु अरोड़ा, विपिन जैन, डॉ. वीना मित्तल, तूलिका सेठ, प्रतिभा प्रीत, वागीश शर्मा, सोनम यादव, साक्षी देशवाल, पराग कौशिक, नीलांबर मुखर्जी, सरवर हसन सरवर, सुरेंद्र शर्मा, टेकचंद, हेम लता, सौरभ कुमार, तपन, पवन अरोड़ा, सिमरन, तन्नु, अभिषेक कौशिक, कुलदीप, सुभाष यादव, अविनाश, नेहा पाल, शशिकांत भारद्वाज, किशनलाल भारती एवं संजीव अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद थे।