भारत सरकार के सहयोग से रेकिट की एक पहल ‘स्टॉप डायरिया कैंपेन’ 

भारत सरकार के सहयोग से रेकिट की एक पहल ‘स्टॉप डायरिया कैंपेन’ 

डायरिया के कारण बच्चों की शून्य मृत्यु दर प्राप्त करना है कैंपेन का लक्ष्य

दिल्ली: दुनिया की अग्रणी कंज्‍यूमर हेल्‍थ एवं हाइजीन कंपनी रेकिट ने नई माताओं और 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए एक सेल्‍फ केयर पहल शुरू की है। यह खास पहल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ‘स्‍टॉप डायरिया कैंपेन’ के साथ जुड़कर पेश की गई है। पिछले सप्ताह भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री माननीय श्री जे.पी. नड्डा ने इस खास कैंपेन की शुरुआत की। इस कैंपेन का उद्देश्य भारत में डायरिया के कारण होने वाली बच्चों की मौत को शून्य करना है।

नई माताओं और पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सेल्फ-केयर कैंपेन की दो महीने की अवधि के दौरान, फ्रंटलाइन वर्कर्स के कैपिसिटी बिल्डिंग सेंसिटाइजेशन सैशन, नुक्कड़ नाटक, रैलियों, पोस्टर और IEC मटेरियल के माध्यम से जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही चुने गए राज्यों में जिला स्तर पर एडवोकेसी और कंम्युनिकेशन स्थापित करने पर फोकस किया जाएगा। कैंपेन की पहुंच बढ़ाने और डायरिया एवं इसके कारणों के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में ब्लॉक को लक्षित करने के लिए इंटरसेक्टोरियल कन्वर्जेंस के आधार पर विभिन्न कार्यक्रम पेश किए जाएंगे। यह कैंपेन लक्ष्य प्राप्ति के लिए भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी (lAP), भारतीय चिकित्सा संघ (IMA), NGO और CSO के सदस्यों के माध्यम से ORS और जिंक को बढ़ावा देने, सुविधाओं को मजबूत बनाने, एडवोकेसी एवं कम्युनिकेशन तथा इंटरसेक्टोरियल कन्वर्जेंस के चार व्यापक दृष्टिकोणों को एक साथ लाता है।

कैंपेन के दौरान, माताओं के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की 7-सूत्री योजना पर सामुदायिक स्तर की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही डायरिया किट भी वितरित की जाएंगी। इसके अलावा कैंपेन का मुख्य फोकस डायरिया प्रबंधन को लेकर लोगों को शिक्षित करने के लिए ऑडियो-वीडियो टूल्स का उपयोग करके जागरूकता बढ़ाने पर होगा। ये कदम कैंपेन के मौजूदा प्रयासों को और मजबूती प्दान करेगा और डायरिया को जड़ से खत्म करने में मदद करेगा।इस कैंपेन की शुरुआत एक उद्घाटन समारोह के साथ गुजरात के गिर सोमनाथ में जिला प्रशासन के सहयोग से हुई है। इस अवसर पर जिला कलेक्टर श्री डी डी जडेजा, रेजिडेंट एडिशनल कलेक्टर श्री राजेश आल, मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरुण रॉय और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद थे।

गिर सोमनाथ के जिला कलेक्टर डी डी जडेजा ने कैंपेन के महत्व पर जोर देते हुए कोविड काल को याद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोविड ने हमें हाथ धोने के बारे में सिखाया है, लेकिन अभी भी दैनिक जीवन के एक अहम हिस्से के रूप में हाईजीन पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत सरकार की पहल का समर्थन करने के लिए चुने गए राज्यों में भी इसी तरह के कैंपेन और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

देश के कई राज्यों में, बचपन में होने वाली डायरिया संबंधी बीमारियां पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौत का प्रमुख कारण बनी हुई हैं। देश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की कुल मौतों में डायरिया की हिस्सेदारी 5.8% है (मृत्यु के कारण सांख्यिकी 2017-19, भारत के महापंजीयक की नमूना पंजीकरण प्रणाली)। हर साल, डायरिया के कारण देश में लगभग 50,000 बच्चों की मौत होती है। NFHS 5 के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों में डायरिया के मामले 7.3% है; जबकि केवल 60.6% को ORS और 30.5% को जिंक उपलब्ध हो पाता है। 68.9% मामलों में, मरीज को कोई चिकित्सा सुविधा या डॉक्टर से परामर्श प्राप्त होता है। 

इस समस्या पर ध्यान देने के लिए, रेकिट ने प्लान इंडिया के साथ साझेदारी में एक पहल शुरू की गई है। जिसमें नई माताओं और पांच साल से कम उम्र के बच्चों को सेल्फ-केयर पहल के माध्यम से ओआरएस और जिंक का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही पांच साल से कम उम्र के बच्चों को हाथ धोने के छह स्टेप सिखाकर उन्हें हाइजीन और सेनिटेशन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

दो महीने का कैंपेन महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में समुदाय के सदस्यों को जोड़ने और शिक्षित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस कैंपेन में हाथ धोने के महत्व पर प्रकाश डाला जाएगा। साथ ही ओआरएस के उपयोग की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा लोगों को सामुदायिक भागीदारी और आवश्यक उपायों की जानकारी दी जाएगी और जरूरी डायरिया किट वितरित की जाएगी। 

इस कैम्पेन के बारे में बात करते हुए गौरव जैन, कार्यकारी उपाध्यक्ष, रेकिट, साउथ एशिया, ने कहा, "रेकिट में, हमें अपने कार्यक्रमों में 'स्वच्छ और स्वस्थ' भारत बनाने की दिशा में भारत सरकार के प्रयासों के साथ मिलकर काम करने पर बेहद गर्व है। पिछले 10 वर्षों में, हमने अपने कार्यक्रमों में छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदायों को शामिल किया है, ताकि उनके संपूर्ण स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार लाया जा सके। हमारे इस प्रयास से पूरे भारत में लाखों बच्चों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया है।

अपनी इस प्रतिबद्धता को और मजबूती प्रदान करते हुए, हम भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए स्टॉप डायरिया कैंपेन के साथ जुड़कर और डायरिया से होने वाली बीमारियों के कारण बच्चों की मौत को शून्य करने की दिशा में काम करते हुए बेहद उत्साहित हैं। हम इस कैंपेन में साथ निभाने और एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण के लिए मिलकर आगे बढ़ने के लिए तत्पर हैं।"

कैंपेन के बारे में बात करते हुए रवि भटनागर, डायरेक्टर, एक्सटर्नल अफेयर्स एंड पार्टनरशिप, एसओए, रेकिट ने कहा, "देश के कई राज्यों में डायरिया पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का मुख्य कारण बना हुआ है। रेकिट में, हम बच्चों खासकर गरीब सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले बच्चों के संपूर्ण कल्याण को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। हमें भारत सरकार के स्टॉप डायरिया अभियान के साथ जुड़ने पर बहुत गर्व है।

इस कैंपेन के माध्यम से, हमारा उद्देश्य ओआरएस और जिंक के उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाना और डायरिया की रोकथाम के लिए सक्रिय स्वास्थ्य उपायों को अपनाना है। इस प्रयास के साथ हमारी कोशिश है कि हम डायरिया के कारण होने वाली बच्चों की मौत को शून्य पर लाने की अपनी प्रतिबद्धता को और विस्तार दे सकें। यह कदम हमारे देश के छोटे बच्चों के लिए एक सेहतमंद भविष्य के निर्माण के हमारे संकल्प को और मजबूती प्रदान करेगा।"

मोहम्मद आसिफ, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, प्लान इंटरनेशनल (इंडिया चैप्टर) ने कहा, "हमारी 'सेल्फ केयर फॉर न्यू मॉम्स एंड किड्स अंडर 5' पहल को 'स्टॉप डायरिया' कैंपेन के साथ जोड़कर, हम डायरिया को खत्म करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने पर गर्व महसूस कर रहे हैं। हम हाईजीन के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने, डायरिया की रोकथाम के लिए ओआरएस और जिंक के इस्तेमाल के बारे में जागरूकता बढ़ाने और सक्रिय स्वास्थ्य उपायों में माताओं और समुदायों को शामिल करने के लिए मिल कर काम कर रहे हैं। सभी के लिए एक सेहतमंद भविष्य के निर्माण की दिशा में हम मिलकर कई जरूरी कदम उठा रहे हैं।"