द्वारका सेक्टर-7 की दो महिलाओं की पुलिस, महिला आयोग से न्याय की आस

शिकायत के बावजूद दर्ज नहीं हो रही एफआईआर

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा सबसे अहम् है, खासकर निर्भया कांड के बाद महिला  अपराध रोकने और उनकी सुरक्षा के प्रति समाज में जागरुकता बढ़ी है। दिल्ली पुलिस भी विभिन्न को-आपरेटिव सोसायटी के साथ मिलकर महिला सुरक्षा अभियान चलाती है, लेकिन उसी दिल्ली में ऐसा भी एक मामला सामने आया है जहाँ महिलाओं की शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होती; जांच में कोताही की जाती है; जाँच का दिखावा तो किया जाता है लेकिन गहराई से जाँच नहीं होती।

ताजा मामला द्वारका सेक्टर-7 की मीडिया सोसायटी का है। यहाँ दो महिलाओं कविता और सुनीता (परिवर्तित नाम) ने पुलिस में लिखित शिकायत की है कि इसी सोसायटी के निवासी संजय झा की संदेहास्पद गतिविधियों के कारण उन्हें अनहोनी का भय घेरे रहता है; कभी जानलेवा हमले का डर भी होने लगता है। उन्होंने सोसायटी अध्यक्ष, दिल्ली महिला आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग और द्वारका सेक्टर-9 पुलिस स्टेशन के एसएचओ से इस मामले की शिकायत की। जहाँ-जहाँ उचित कार्रवाई की उम्मीद थी, वहाँ वहाँ उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज करवाई लेकिन अभी तक कैई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 

द्वारका सेक्टर-9 पुलिस स्टेशन के एसएचओ को दी गई कविता की लिखित शिकायत के अनुसार, सोसायटी पार्किंग में कार में और राह चलते बिना उनकी अनुमति के संजय झा उनकी फोटो खींचकर उनकी निजी सूचना दूसरे लोगों तक भेजते हैं। यह उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन है। इतना ही नहीं, उन पर सोसायटी गेट के सामने हमला भी हुआ था और उस वक्त के फोटो भी संजय झा के पास हैं। इससे वह काफी डरी हुई हैं और मेंटल ट्रॉमा से गुजर रही हैं। उनके पति काम के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते हैं। कविता ने बताया कि संजय झा से उन्हें और उनके परिवार को जान-माल का खतरा है। चिंताजनक बात यह है कि पुलिस, महिला आयोग (राष्ट्रीय और दिल्ली) से शिकायत के बावजूद समुचित जांच शुरू नहीं हुई है। 

सोसायटी की दूसरी महिला सुनीता की थाना अध्यक्ष सेक्टर-9 पुलिस स्टेशन को दी गई लिखित शिकायत के अनुसार, संजय झा लंबे समय से उनके पीछे पड़ा है। सोसायटी के अंदर उनकी कार की फोटो खींचकर दूसरों को भेजता है। हर स्तर पर शिकायत के बावजूद कोई कारगर कार्रवाई नहीं हुई; और तो और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के कई महीनों बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।

राष्ट्रीय और दिल्ली, दोनों महिला आयोगों में भी शिकायत की थी। उसका भी कोई असर अब तक नहीं हुआ है। सुनीता के अनुसार, वह एवं उनके माता-पिता डायबिटिक हैं, मां की बाईपास सर्जरी हुई है। ऐसे में संजय झा की अनवरत नाजायज हरकतों से वह मानसिक प्रताड़ना से गुजर रही हैं। दोनों पीड़ितों की पुलिस और महिला आयोग से अनुरोध है कि इस संबंध में उचित जांच कर उन्हें मानसिक प्रताड़ना से मुक्ति दिलाएँ।