गलत आदेशों की वजह से नोएडा की एक और सोसाईटी एल्डेको आमंत्रण में गहराया विवाद

गलत आदेशों की वजह से नोएडा की एक और सोसाईटी एल्डेको आमंत्रण में गहराया विवाद

नोएडा: नोएडा सेक्टर-119 स्थित एल्डेको आमंत्रण सोसाइटी में सितंबर 2024 में संपन्न हुए चुनावों के बाद से विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सोसाइटी बायलॉज के अनुसार, दोनों टीमों के 5-5 सदस्यों के चुने जाने के पश्चात, कार्यकारिणी पदाधिकारियों का चयन निर्वाचित बोर्ड द्वारा किया जाना चाहिए था। परंतु उप पंजीयक कार्यालय द्वारा इस प्रक्रिया का पालन न करते हुए जीबीएम के माध्यम से चयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है. जिससे निवासियों में असंतोष व्याप्त है।

एल्डेको आमंत्रण सोसाइटी के कई निवासी लगातार बायलॉज के अनुसार ही प्रक्रिया अपनाने की मांग कर रहे हैं, परंतु अब तक न तो डीआर कार्यालय ने कोई स्पष्ट नियम साझा किया है. और न ही उनकी ओर से उठाए गए सवालों का कोई जवाब दिया गया है।

पिछले छह महीनों में नियुक्त दो पर्यवेक्षकों में से एक ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया कि अधिकांश निर्वाचित सदस्य बायलॉज के अनुरूप कार्यकारिणी का गठन चाहते हैं, न कि जीबीएम के माध्यम से। इसके बावजूद उप पंजीयक कार्यालय ने हाल ही में एक नए पर्यवेक्षक की नियुक्ति की, जिनका झुकाव जीबीएम आधारित चयन की ओर प्रतीत होता है। उन्होंने बिना किसी निर्वाचित सदस्य से चर्चा किए और बिना प्रक्रिया समझाए जीबीएम का नोटिस जारी कर दिया है।

डीआर को स्पष्ट रूप से पूछा गया कि क्रिस नियम के तहत जीबीएम में पदाधिकारियों का चुनाव कराया जा रहा है जबकि यह सोसाइटी के बायलॉज के क्लॉज 18 के प्रतिकूल है। डीआर से यह भी पूछा गया कि क्या वे किसी एक सोसाइटी का उदाहरण दे सकते हैं जहां चुनाव के बाद जीबीएम में ऑफिस बियरर्स का चयन हुआ हो? लेकिन डीआर कार्यालय से अब तक कोई उत्तर नहीं मिला है। इसी तरह पूर्व पर्यवेक्षक ने भी लिखित रूप में डीआर से नियम पूछे थे. जिनका कोई जवाब नहीं दिया गया।

साथ ही, यहां किसी भी अधिसूचना की कॉपी सोसाइटी के सचिव को नहीं दी गई है। सचिव ने स्पष्ट किया कि उन्हें न तो पर्यवेक्षक परिवर्तन की कोई सूचना मिली. न ही नए पर्यवेक्षक द्वारा कोई संवाद स्थापित किया गया है। जीबीएम के लिए जो पत्र जारी किया गया है, उसमें भी सचिव को कुछ भी लिखित में नहीं भेजा गया है। वहीं उपाध्यक्ष ने बताया कि नए पर्यवेक्षक केवल एक पक्ष विशेष से संवाद कर रहे हैं, जबकि बाकी निर्वाचित सदस्यों से कोई चर्चा नहीं की गई है।

निवासियों ने जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर, स्थानीय सांसद डॉ. महेश शर्मा और अन्य अधिकारियों से इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप की मांग की है। वर्तमान अध्यक्ष और पुनः निर्वाचित सदस्य श्री निखिल सिंघल ने कहा. "हमें न तो जीबीएम की प्रक्रिया की कोई स्पष्ट जानकारी दी गई है और न ही इसमें किन विषयों पर चर्चा या निर्णय होने हैं, यह बताया गया है। इससे न केवल पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं. बल्कि यह भी प्रतीत होता है कि प्रक्रिया को जल्दबाजी में आगे बढ़ाया जा रहा है। केवल 7 दिन का नोटिस देना न सिर्फ असंगत है, बल्कि यह अधिकांश सदस्यों की भागीदारी को भी सीमित करता है। इस तरह की बैठक के लिए कम से कम 30 दिन की पूर्व सूचना दी जानी चाहिए, ताकि हर सदस्य को अपनी व्यस्तताओं के अनुसार तैयारी का पूरा अवसर मिल सके और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान बना रहे।"

वहीं ऋषि पुरवार, उपाध्यक्ष ने मांग की, "हमें स्पष्ट रूप से बताया जाए कि जीबीएम में क्या होने वाला है-क्या वोटिंग होगी और यदि होगी तो वह गुप्त मतदान के ज़रिए होनी चाहिए। हाथ उठाकर वोटिंग करना न तो सही तरीका है और न ही पारदर्शी। हमें आज तक यह भी नहीं बताया गया कि जीबीएम में असल में किया क्या जाना है। अभी तक जीबीएम के लिए कोई एजेंडा साझा नहीं किया गया है, जबकि बिना एजेंडा के जीबीएम आयोजित नहीं की जा सकती।"

निवासियों का कहना है कि जब चुनाव में 531 सदस्यों ने मतदान किया था, तो जीबीएम में मात्र 50 लोगों की भागीदारी से कार्यकारिणी का गठन अनुचित और असंवैधानिक है। इसी कारणवश, वे अब न्यायालय का रुख करने पर विचार कर रहे हैं।

एल्डेको आमंत्रण सोसाइटी के निवासी आशा करते हैं कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देगा और निष्पक्ष, पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया को सुनिश्चित कर सोसाइटी में स्थिरता और विश्वास बहाल करेगा।