ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की सख्ती से अधिवक्ता चैंबर बनाने से पीछे हटी बार, इकट्ठा किए गए डेढ़ करोड़ रुपए वापस लौटाने की चुनौती 

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की सख्ती से अधिवक्ता चैंबर बनाने से पीछे हटी बार, इकट्ठा किए गए डेढ़ करोड़ रुपए वापस लौटाने की चुनौती 

राजेश बैरागी की कलम से 
 ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की सख्ती के चलते गौतमबुद्धनगर जिला न्यायालय बार एसोसिएशन ने जिला उपभोक्ता फोरम परिसर में कथित तौर पर अवैध रूप से बनाए जा रहे डेढ़ सौ अधिवक्ता चैंबर निर्माण फ़िलहाल स्थगित कर दिया है।इन चैंबरों के लिए आवेदन के साथ इकट्ठा किए गए डेढ़ सौ करोड़ रुपए वापस पाने के लिए अधिवक्ताओं द्वारा बार पदाधिकारियों के विरुद्ध मोर्चा खोला जा सकता है।

गौतमबुद्धनगर जिला न्यायालय बार एसोसिएशन द्वारा विवादित रूप से जिला उपभोक्ता फोरम परिसर में बनाए जा रहे डेढ़ सौ अधिवक्ता चैंबरों के निर्माण का आज मानो पटाक्षेप हो गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बार अध्यक्ष मनोज भाटी बोड़ाकी और सचिव शोभाराम चंदीला ने आज सोमवार को बार कार्यालय में अधिवक्ताओं के बीच चैंबर निर्माण रोकने की घोषणा की। दोनों पदाधिकारियों ने चैंबर निर्माण न करने के पीछे विधिक और तकनीकी कारण बताए हैं। उल्लेखनीय है कि वर्तमान बार एसोसिएशन ने चैंबर विहीन छः सौ अधिवक्ताओं के लिए डेढ़ सौ चैंबर बनाने की घोषणा की थी।

एक चैंबर में चार अधिवक्ताओं को समायोजित किया जाना था। इसके लिए छः सौ अधिवक्ताओं से पच्चीस-पच्चीस हजार रुपए आवेदन के साथ जमा कराए गए।बार पदाधिकारियों ने चैंबर बनाने के लिए जिला उपभोक्ता फोरम के परिसर में अवैध रूप से निर्माण कार्य शुरू करा दिया। इसके लिए जिला न्यायालय और फोरम की साझी दीवार को जिला न्यायालय की ओर से तोड़ दिया गया। बताया गया है कि अवैध रूप से जिला उपभोक्ता फोरम के परिसर में चैंबर बनाने को लेकर अधिवक्ताओं में तो विरोध के स्वर उठ ही रहे थे, जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिल कुमार पुंडीर द्वारा भी जिलाधिकारी को पत्र लिखकर शिकायत की गई थी। उधर अधिवक्ताओं की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बार एसोसिएशन को नोटिस जारी कर चैंबरों के निर्माण पर जवाब तलब किया।बार द्वारा तथ्यहीन जवाब पर सख्त रुख अपनाते हुए प्राधिकरण ने न केवल निर्माण रोकने का आदेश दिया बल्कि कमिश्नरेट से निर्माण ध्वस्त करने के लिए पुलिस बल की भी मांग की।

विवाद बढ़ता देख बार पदाधिकारियों ने चैंबर निर्माण से फिलहाल हाथ खींच लेना ही उचित समझा। हालांकि बार द्वारा दो दिन बाद इस मुद्दे पर प्राधिकरण के घेराव की भी तैयारी की जा रही है। उधर चैंबर मिलने की संभावना समाप्त होने पर आवेदक अधिवक्ताओं द्वारा जमा धनराशि वापस लेने के लिए बार पदाधिकारियों के विरुद्ध मोर्चा भी खोला जा सकता है। यहां यह भी गौरतलब है कि बार द्वारा बनाए जा रहे बहुमंजिला चैंबर की एक मंजिल का ढांचा तैयार कर दिया गया है जिसपर चालीस पचास लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं।(नेक दृष्टि)(ऐसे ही अन्य समाचारों आलेख के लिए हमारी वेबसाइट www.nekdristi.com देखें)