स्वामी रामभद्राचार्य (गुरुजी) नोएडा स्टेडियम में 27 जुलाई से 04 अगस्त तक सुनाएंगे श्री राम कथा
नोएडा। श्री रामराज फाउंडेशन और हनुमान सेवा न्यास की ओर से नोएडा स्टेडियम, सेक्टर 21ए में 27 जुलाई से 04 जुलाई तक श्री राम कथा का आयोजन किया जा रहा है।
रामराज फाउंडेशन के अध्यक्ष अविनाश शुक्ला ने बताया कि इस कथा का वाचन प्रख्यात आध्यात्मिक मार्गदर्शक पद्मविभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य (गुरुजी) करेंगे। गुरुजी का परिचय तो सर्वविदित है तथापि विदित हो कि गुरुजी एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और प्राचीन शास्त्रों और दर्शन के प्रकांड विद्वान हैं। दशकों के समर्पित अध्ययन और अभ्यास के साथ आपने भगवान राम की शिक्षाओं और हमारी संस्कृति की समृद्ध आध्यात्मिक धरोहर में गहरी अंतर्दृष्टि प्राप्त की है।

माता शची देवी और पिता पण्डित राजदेव मिश्र के पुत्र जगद्गुरु रामभद्राचार्य का जन्म एक वसिष्ठगोत्रिय सरयूपारीण ब्राह्मण परिवार में उत्तर प्रदेश राज्य के जौनपुर जिले के सांडीखुर्द (अब शचीपुरम) नामक ग्राम में 1950 में हुआ। गुरुजी रामानन्द सम्प्रदाय के वर्तमान चार जगद्गुरु रामानन्दाचार्यों में से एक हैं। वे चित्रकूट में स्थित संत तुलसीदासजी के नाम पर स्थापित तुलसी पीठ नामक धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्थान के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। वे चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन कुलाधिपति हैं।
पद्मविभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य दो मास की आयु में नेत्र की ज्योति से रहित हो गए थे और तभी से प्रज्ञाचक्षु हैं। अध्ययन या रचना के लिए उन्होंने कभी भी ब्रेल लिपि का प्रयोग नहीं किया है। वे बहुभाषाविद् हैं और 22 भाषाएँ बोलते हैं। वे संस्कृत, हिन्दी, अवधी, मैथिली सहित कई भाषाओं में आशुकवि और रचनाकार हैं। उन्होंने 300 से अधिक पुस्तकों और ग्रंथों की रचना की है। पांच साल की उम्र में गुरुजी को पूरी श्रीभगवतगीता जी और सात साल की उम्र में उन्हें पूरी श्रीरामचरितमानस जी कंठस्थ थी ।
श्रीराम जन्मभूमि मामले में विशेषज्ञ गवाह के रूप में गवाही दी
दिवेश प्रताप ने बताया कि पद्मविभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने न्यायालय में श्रीराम जन्मभूमि मामले में विशेषज्ञ गवाह के रूप में गवाही दी। गुरुजी के बयान से फैसला भगवान राम के पक्ष में आ गया। न्यायाधीश ने स्वीकार किया, "आज मैंने चमत्कारिक भारतीय ज्ञान देखा एक व्यक्ति जो भौतिक आंखों से रहित है, वह वृहद वेदों और ग्रंथों से उद्धरण कैसे दे रहा है? यह दिव्य शक्ति नहीं तो और क्या है?"।
पद्मविभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य के मनोरम प्रवचनों और परम ज्ञान ने दुनिया भर में अनगिनत व्यक्तियों के जीवन को प्रभावित किया है। श्रोतागणों से जुड़ने और भगवान राम द्वारा दिखाए गए धार्मिकता, करुणा और भक्ति के कालातीत सिद्धांतों के संप्रेषण के उनके कौशल ने उन्हें एक सर्वप्रिय आध्यात्मिक मार्गदर्शक बना दिया है।
दिवेश प्रताप ने बताया कि हमारे लिए यह अत्यंत सम्मान का विषय है कि गुरुजी अपनी दिव्य उपस्थिति से श्री राम कथा की शोभा बढ़ाएंगे। उनका प्रगाढ़ ज्ञान और शास्त्रों की गहरी समझ आध्यात्मिक प्रवचन को आलोकित करेगी, जिससे हमें भगवान राम की शिक्षाओं और सदगुणों में गहराई से उतरने का अवसर प्राप्त होगा। उनकी प्रबुद्ध उपस्थिति हमारे सामूहिक आध्यात्मिक अनुभव को समृद्ध करेगी तथा हमें अपने जीवन को और अधिक उद्देश्यपूर्ण और सद्भाव के साथ आगे बढ़ाने में सहयोग हेतु महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करेगी।


