नाबार्ड सहकार हाट 20 दिसंबर 2025 तक चलेगा

नाबार्ड सहकार हाट 20 दिसंबर 2025 तक चलेगा

19 राज्यों के सहकारी उद्यमी नाबार्ड सहकार हाट में भाग ले रहे हैं

नई दिल्ली: ‘सहकार से व्यवसाय तक – नाबार्ड के साथ’केन्द्रित  विषय पर आधारित नाबार्ड सहकार हाट 2025”, का उद्घाटन 15 दिसंबर 2025 को स्टेट एम्पोरिया कॉम्प्लेक्स, बाबा खरक सिंह मार्ग, कनॉट प्लेस में किया गया। यह आठ दिवसीय आयोजन 13 से 20 दिसंबर 2025 तक चलेगा, जिसमें 15+ राज्यों के 50 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। इस आयोजन में विशेष रूप से जैविक उत्पादों और पारंपरिक हस्तशिल्प पर जोर दिया गया है, जो हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं।

कार्यक्रम का उद्घाटन रविंदर इंद्राज सिंह, सहकारिता मंत्री, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार, के महेश, आईएएस, प्रबंध निदेशक, दिल्ली खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (डीकेवीआईबी),श्री राजेश कुमार, महाप्रबंधक एवं संयोजक एसएलबीसी दिल्ली, और श्री नवीन कुमार राय, महाप्रबंधकएवं प्रभारी अधिकारी, नाबार्ड, नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। नाबार्ड के इस प्रदर्शन समारोह के उद्घाटन दिवस पर एम के बंसल,उप प्रबंधनिदेशक, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी),डॉ. सुधीर महाजन, आईएएस (सेवानिवृत्त), मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एनसीयूआई,और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिती रही।

उद्घाटन के दौरान रविंदर इंद्राज सिंह ने नाबार्ड के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने पूरे भारत में सहकारी समितियों के जीवंत योगदान को प्रदर्शित किया है, विशेषकर हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद और अन्य ग्रामीण उद्यमों के क्षेत्रों में। उन्होंने जैविक उत्पादों, जीआई टैग वाले शिल्प और सतत ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

नवीन कुमार राय ने कहा कि, “इस पहल के माध्यम से हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कारीगरों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं। जब कारीगर और किसान कार्यशील होते हैं, तब भारत सशक्त होता है। यह हाट न केवल परंपरा को संरक्षित करता है बल्कि ग्रामीण युवाओं और शिल्पकारों को सशक्तिकरण का मंच भी प्रदान करता है।”

इस प्रदर्शनी का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्पकला और भौगोलिक संकेत (जीआई) उत्पादों को एक ही मंच पर प्रदर्शित करना है। प्रदर्शनी में हथकरघा रेशमी साड़ियां, कच्छ कढ़ाई, टेराकोटा शिल्प, जैविक मसाले, मिलेट्स, सूखे मेवे और पारंपरिक कला रूप जैसे ऐपन कला शामिल हैं। पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों और विरासत शिल्प के ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया गया है।

सहकार हाट में आने वाले आगंतुकों को विभिन्न उत्पादों को देखने और खरीदने का अवसर मिलेगा क्योंकि प्रत्येक स्टॉल भारत की परंपरा, स्थिरता और पुरातन कला की कहानी कहता है। इसमें असम, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, महाराष्ट्र, मणिपुर, तेलंगाना और अन्य सहित 19 राज्यों के उद्यमी भाग ले रहे हैं।