लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने से हुआ ट्रेकियल स्टेनोसिस, फेलिक्स अस्पताल में हुआ सफल ऑपरेशन

लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने से हुआ ट्रेकियल स्टेनोसिस, फेलिक्स अस्पताल में हुआ सफल ऑपरेशन

गंभीर हादसे के बाद श्वास नली संकुचन से जूझ रहे मरीज को नई जिंदगी

नोएडा: मेजर सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक मरीज को फेलिक्स अस्पताल में एक जटिल ब्रोंकोस्कोपिक प्रक्रिया के बाद नई जिंदगी मिली है। मरीज को हादसे में चेहरे, गर्दन, रीढ़ (स्पाइन) और होंठों में मल्टीपल फ्रैक्चर हुआ था। जिसके चलते उसे लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रखा गया। इलाज के दौरान उसकी स्थिति बेहद नाजुक बनी रही और सांस लेने के लिए श्वासनली में ट्यूब लगानी पड़ी, जिसे लंबे समय तक नहीं हटाया जा सका।

इस संबंध में वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. प्रियदर्शी जीतेन्द्र कुमार  ने बताया कि सड़क हादसे का शिकार होने पर मरीज को हादसे में चेहरे, गर्दन, रीढ़ (स्पाइन) और होंठों में मल्टीपल फ्रैक्चर हुआ था। मरीज को प्रारंभिक उपचार के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इलाज के दौरान उसकी स्थिति बेहद नाजुक बनी रही और सांस लेने के लिए श्वासनली में ट्यूब लगानी पड़ी, जिसे लंबे समय तक नहीं हटाया जा सका था। जिसके चलते उसे लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रखा गया था। जहां उसकी हालत स्थिर तो हो गई, और उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। करीब एक से डेढ़ महीने बाद मरीज को श्वास लेने में दिक्कत होने लगी । धीरे-धीरे यह समस्या गंभीर होती गई और मरीज को सामान्य सांस लेना भी मुश्किल हो गया। इसके बाद परिजन गूगल के माध्यम से मिली जानकारी के बाद मरीज को फेलिक्स अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मरीज की स्थिति का गहन परीक्षण किया। स्पाइरल सीटी स्कैन के जरिए जांच में सामने आया कि मरीज ट्रेकियल स्टेनोसिस यानी श्वास नली के संकुचन से पीड़ित है।

यह स्थिति अक्सर लंबे समय तक वेंटिलेटर या इंट्यूबेशन (ट्यूब के जरिए सांस दिलाना) के कारण उत्पन्न होती है। डॉक्टरों की टीम ने प्लांड तरीके से ब्रोंकोस्कोपी की प्रक्रिया अपनाई और फिर पाया की गाइड वायर हीं किसी तरह निगोशिएट हो सकता है संकुचन से । डायलेटर तो दूर, बॉगी  भी हार्डली क्रॉस कर पाया था । फिर वर्चुअल ब्रोंकोस्कोपी कराई गई ताकि संकुचन का दायरा पता चल सके । तदोपरांत सीरियल डाइलेटेशन से उसे ठीक किया जा सका ।

ऑपरेशन सफल रहा और अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहा है। समय रहते सही इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकी  ट्रेकियल स्टेनोसिस एक गंभीर स्थिति होती है, जिसमें श्वास नली का हिस्सा संकरा हो जाता है, जिससे फेफड़ों तक हवा का प्रवाह बाधित हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह समस्या अधिकतर उन मरीजों में देखी जाती है, जो लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहते हैं या जिनकी श्वासनली में लंबे समय तक ट्यूब लगी रहती है।

इस बीमारी के मुख्य लक्षणों में सांस फूलना, सीटी जैसी आवाज के साथ सांस आना, बार-बार खांसी और थकान शामिल हैं। कई बार मरीज इसे सामान्य सांस की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देता है, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है। ट्रेकियल स्टेनोसिस के इलाज के लिए समय पर पहचान बेहद जरूरी है। शुरुआती अवस्था में दवाओं और फिजियोथेरेपी से राहत मिल सकती है, लेकिन गंभीर मामलों में ब्रोंकोस्कोपी  डाइलेटेशन या सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।

यदि समय पर इलाज न कराया जाए तो मरीज को सांस लेने में अत्यधिक परेशानी हो सकती है और जान का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है। ऐसे मरीजों के लिए पोस्ट-ऑपरेटिव फिजियोथेरेपी भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट पाता है। लोगों से अपील की कि यदि किसी को लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद सांस लेने में परेशानी हो रही हो तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इस सफल इलाज ने यह साबित कर दिया कि जटिल से जटिल स्थिति में भी समय पर सही निदान और विशेषज्ञ उपचार से मरीज को नई जिंदगी दी जा सकती है। मरीज के परिजन ने अस्पताल और डॉक्टरों का धन्यवाद किया है।