नई दिल्ली। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम व्यापार आंकड़ों पर टिपण्णी करते हुए फेडेरेशन ऑफ इंडियान एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष श्री एस सी रल्हन ने भारत के निर्यात में जोरदार बढ़ोतरी पर संतोष जताया जो देश के निर्यात सेक्टर की गतिशीलता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रदर्शित करता है।
भारत का वस्तु व्यापार नवंबर में 38.13 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया जो 19.37 प्रतिशत की मजबूत वर्ष दर वर्ष वृद्धि को प्रदर्शित करता है। महीने के दौरान वस्तु आयात 62.66 बिलियन डॉलर का रहा। सेवा सेक्टर के मोर्चे पर निर्यात में उल्लेखनीय बढोतरी हुई जो 32.11 बिलियन डॉलर से बढ़कर 35.86 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। सेवा आयात में पिछले वर्ष की समान अवधि के 17.25 बिलियन डॉलर की तुलना में थोड़ी वृद्धि हुई और यह 17.96 बिलियन डॉलर हो गया।
श्री एस सी रल्हन ने कहा कि सेवा निर्यात में मजबूत गति के साथ वस्तु निर्यात में लगभग 19.4 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि भारत के निर्यात सेक्टर के लिए बहुत आशाजनक संकेत है। व्यापार में तेज गिरावट लगातार जारी भूराजनीतिक तनाव और दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी वैश्विक मांग को दक्षतापूर्वक पूरा करने में भारतीय निर्यातकों की क्षमता को रेखांकित करती है।
फियो अध्यक्ष ने कहा कि कुल मिलाकर, भारत का कुल निर्यात नवंबर में 73.99 बिलियन डॉलर तक जा पहुंचा जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 64.05 बिलियन डॉलर की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। महीने के दौरान कुल आयात में मामूली गिरावट आई जो जो नवंबर 2024 के 81.11 बिलियन डॉलर की तुलना में घटकर 80.63 बिलियन डॉलर पर आ गया। एक मुख्य सकारात्मक विशेषता वस्तु व्यापार घाटे में आई कमी रही जो अक्तूबर के 41.68 बिलियन डॉलर से कम होकर 24.53 बिलियन डॉलर पर आ गया। यह मजबूत निर्यात गति और बेहतर व्यापार प्रबंधन को प्रदर्शित करता है।
श्री रल्हन ने इस बात पर भी बल दिया कि कई प्रमुख सेक्टरों में निरंतर गतिशीलता के साथ साथ निर्यात बाजारों के विविधीकरण ने निर्यात वृद्धि को सहायता देने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि निरंतर नीतिगत सहायता, बेहतर लाॅजिस्ट्क्सि दक्षता और प्रतिस्पर्धी निर्यात वित्तपोषण के साथ, भारत का निर्यात आगे आने वाले महीनों में इस सकारात्मक मार्ग को बनाये रखने की अच्छी स्थिति में है।
फिये प्रमुख ने दुहराया कि अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान 50 प्रतिशत का उच्च टैरिफ थोपे जाने के बावजूद अमेरिका भारत का शीर्ष निर्यात गंतव्य बना रहा। यह स्पष्ट रूप से भारत के निर्यातक समुदाय की गतिशीलता और अनुकूलता प्रदर्शित करता है। इस अवधि के अन्य प्रमुख निर्यात गंतव्यों में यूएई, नीदरलैंड, चीन, ब्रिटेन, जर्मनी, सिंगापुर, बांग्ला देश, सऊदी अरब और हांगकांग शामिल थे। आयात के मामले में प्रमुख आयातक देशों में चीन, अमेरिका, रूस, सऊदी अरब, इराक, हांगकांग, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड और जापान शामिल थे।
श्री रल्हन ने दुहराया कि लागत प्रतिस्पर्धा में सुधार लाने, अनुपालन तथा प्रक्रियागत चुनौतियों को सरल बनाने और निर्यात वृद्धि को बनाये रखने तथा व्यापार घाटे में और कमी लाने के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से निरंतर नीतिगत उपायों की आवश्यकता है।