एमिटी विश्वविद्यालय में फैशन परिधान एवं वस्त्र पर अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

एमिटी विश्वविद्यालय में फैशन परिधान एवं वस्त्र पर अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी द्वारा ‘‘फैशन परिधान एंव वस्त्र’’ पर अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन (आईएनसीएफएटी 2025) का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का शुभारंभ थर्ड आईसाइट के संस्थापक श्री देवांगशु दत्ता, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फाइन आटर्स की चेयरपरसन श्रीमती दिव्या चौहान, पैरागॉन अपेरल प्राइवेट लिमिटेड के एमडी श्री रोशन बैद्य, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला, अचीवर्स कंसल्टिंग श्रीमती कमल कपूर, स्ट्राबेरी स्टूडियों एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के एमडी श्री हेमंत रूपारेलिया और एमिटी विश्वविद्यालय के ग्रुप एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डा प्रदीप जोशी द्वारा किया गया।

सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए थर्ड आईसाइट के संस्थापक श्री देवांगशु दत्ता ने कहा कि जीवन मे शुद्ध हवा, पानी एवं भोजन बेहद महत्वपूर्ण है और आपको इन वस्तुओ सें भी प्रेरणा लेनी चाहिए। फैशन सदैव अन्य विषयों से प्राप्त किया जाता है जिन्हे पोषित करके प्रयोग में लाया जाता है। भारत का टेक्सटाइल सेक्टर उत्पादन और रोज़गार के मामले में दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। हम नई रचना का निर्माण इसलिए करते है क्योकी कुछ पुराना हो रहा है। उन्होने छात्रो ंसे कहा कि आज कंपनियों को कुशल व्यक्तियों की आवश्यकता है इसलिए सदैव इस बात को समझे कि मुझे स्वंय को कैसे आकार देना है, स्वंय के कौशल को किस प्रकार विकसित करना है और उद्योगों के अनुरूप स्वंय को किस तरह तैयार करना है। आप सदैव अनुभवी विशेषज्ञों के ज्ञान का उपयोग करे किंतु उस पर निर्भर ना रहे।

एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फाइन आर्ट्स की चेयरपरसन श्रीमती दिव्या चौहान ने कहा कि फैशन और टेक्सटाइल उद्योग के क्षेत्र में स्थिरता, डिजिटल तकनीक जैसे एआई, मशील लर्निंग और 3डी प्रिटिंग जैसे नवाचार से बड़ा बदलाव आ रहा है। इन बदलावों को समझना फैशन उद्योग के भविष्य के नेतृत्वतकर्ताओ के लिए बेहद आवश्यक है इसलिए एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी द्वारा इस प्रकार के सम्मेलन का आयोजन किया गया जहां छात्रों को विशेषज्ञों से ज्ञान प्राप्त हो।

पैरागॉन अपेरल प्राइवेट लिमिटेड के एमडी श्री रोशन बैद्य ने कहा कि भारत एक कपास आधारित देश है और परिधान एवं फैशन उद्योग में आधुनिक तकनीको ंसे बड़ा बदलाव आया है। आज के युवा छात्र प्राकृतिक रूप से तकनीकी प्रेमी है। वर्तमान में देश में फंडिग, स्टार्टअप प्रोत्साहन आदि सरकारी सहयोगों के जरीए उद्यमिता के पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो रहा है। अगर आपके पास विचार है तो आप नये उद्योगों का संचालन कर सकते है। श्री बैद्य ने कहा कि उद्यमिता के संर्दभ में विचार करे और देश की अर्थव्यवस्था में भागीदार बने।

एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला ने कहा कि इस सम्मेलन का विषय विकसित भारत के दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ है इसलिए आप परिधान व वस्त्र उद्योग से जुड़े युवाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। डा शुक्ला ने कहा कि नवाचार पर फोकस करते हुए स्वंय कर उद्यम प्रारंभ करने पर ध्यान दे। एमिटी विश्वविद्यालय में आपको नवाचार के अवसर और उद्योग प्रारंभ करने के अवसर प्राप्त हो रहे है।

अचीवर्स कंसल्टिंग श्रीमती कमल कपूर ने संबोधित करते हुए कहा कि मेरा पहला फैशन यात्रा करना है, प्रकृति और उसके अनुभव मुझे नई उर्जा प्रदान करते है। फैशन एवं टेक्सटाइल उद्योग में आये बदलाव आपको नवाचार के अवसर प्रदान कर रहे है। नवाचर नेपथ्य में नही होता यह प्रतिमान बदलाव का साक्षी होता है।

एमिटी विश्वविद्यालय के ग्रुप एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डा प्रदीप जोशी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि फैशन, परिधान व वस़्त्र उद्योगएक परिवर्तनकारी चरण से गुजर रहा है, जो स्थायी प्रथाओं और अत्याधुनिक तकनीकी नवाचारों की बढ़ती मांग से प्रेरित हो रहा है। ऐसे में क्षेत्र के छात्रों को प्रौद्योगिकी के उपयोग की जानकारी होना आवश्यक है। एमिटी द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उददेश्य छात्रों को फैशन एवं टेक्सटाइल के क्षेत्र में परिवर्तन और नये नवाचारो सहित अवसरों की जानकारी प्रदान करना है।

तकनीकी सत्र के अंर्तगत फैशन और टेक्सटाइल के स्थिर अभ्यास पर प्रथम सत्र का आयोजन किया गया जिसमें एनआईएफटी दिल्ली की डीन डा वंदना भंडारी, फैशन डिजाइन की पूर्व चेयरपरसन प्रो कुसुम चोपड़ा ने अपने विचार रखे। ‘‘ फैशन और टेक्सटाइल में डिजिटलाइजेशन और प्रौद्योगिकी’’ पर आयोजित द्वितीय सत्र का आयोजन किया गया जिसमें यूके के मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटीन यूनिवर्सिटी के फैशन मार्केटिंग के रीडर डा पैट्सी पेरी ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर एनआईएफटी भूवनेश्वर, वनस्थली विद्यापीठ राजस्थान, महराजा अग्रसेन हिमालायन गढ़वाल यूनिवर्सिटी, झारखंड के आरका जैन विश्वविद्यालय, उज्जैन की अंवतिका यूनवर्सिटी आदि के शोधार्थियों ने पेपर प्रस्तुत किये।