आर्य समाज के पदों पर युवाओं को दें अवसर: आचार्य वीरेंद्र शास्त्री

आर्य समाज के पदों पर युवाओं को दें अवसर: आचार्य वीरेंद्र शास्त्री

राजेश बैरागी की कलम से.. 

क्या आर्य समाज अपने पदों से चिपके रहने वाले बुजुर्ग और वृद्ध लोगों के बोझ के कारण वैसी प्रगति नहीं कर पा रहा है जैसी अपेक्षित है? क्या आर्य समाज की पताका उठाने वाले लोग अपने बच्चों को आर्य समाज से जोड़ पाने में असफल हैं? जनपद गौतमबुद्धनगर की दादरी तहसील के पल्ला गांव में चल रहे ऋग्वेद पारायण यज्ञ के समापन अवसर पर सहारनपुर से पधारे आचार्य वीरेंद्र शास्त्री ने आज अपने ओजस्वी प्रवचन में इन्हीं खामियों के लिए आर्य समाज के लोगों को आड़े हाथों लिया।

आचार्य वीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आर्य समाज के विस्तार में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए। परंतु देखने में आता है कि समाज के प्रमुख पदों पर अधेड़ और ऐसे वृद्ध लोगों ने कब्जा जमा रखा है जो न तो स्वयं कुछ कर पाते हैं और न किसी को कुछ करने देते हैं। उन्होंने कहा कि वेद पारायण यज्ञों में आने वाले अधिकांश लोग केवल उपस्थित दिखाने के लिए आते हैं।

अपने बच्चों को आर्य समाज से नहीं जोड़ पाते हैं। बच्चों के साथ बैठकर न बातें करते हैं और न खाना खाते हैं। इसीलिए समाज में संस्कारों का ह्रास हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे कितने लोग हैं जिनके यहां प्रतिदिन यज्ञ होता है। ऐसे कितने लोग हैं जिनके यहां होने वाले यज्ञ में उनके बच्चे भी शामिल होते हैं। श्री शास्त्री ने कहा कि आर्य समाज की पद्धति को आचरण में लाना ही आर्य समाज का विस्तार करना है। उल्लेखनीय है कि पल्ला गांव निवासी सुखवीर सिंह आर्य और उनका परिवार प्रतिवर्ष दो बार वेद पारायण यज्ञ का आयोजन करता है जिसमें आसपास और दूरदराज क्षेत्रों से आर्य समाज के प्रमुख लोग शामिल होते हैं।

सभार : नेक दृष्टि