एमएसएमई सेक्टर की बजट से बड़ी उम्मीदें

एमएसएमई सेक्टर की बजट से बड़ी उम्मीदें

देश का आम बजट 1 फरवरी 2022 को पेश किया जाएगा। इस बार उम्मीद है कि सरकार कोई बड़ी घोषणा कर सकती है।

ऐसे में इंडियन इंडस्ट्रीज़ असोसिएशन (IIA) नोएडा चैप्टर ने एक चिंतन बैठक करी और कोरोना से सबसे प्रभावित एमएसएमई (MSME) सेक्टर की ओर से माँग करती है कि जीएसटी की दरों को इस सेक्टर के लिए उपयुक्त बनाया जाए और जीएसटी की दरों पर एक बार फिर विचार किया जाना चाहिए। हम यह भी उम्मीद करते हैं कि सरकार घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सुधारों को लागू करेगी।

इंडियन इंडस्ट्रीज़ असोसिएशन नोएडा चैप्टर के अध्यक्ष राहुल जैन के अनुसार MSMEs को केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के सभी लंबित बकाया की निकासी: समस्या से सीधे निपटने के लिए और इस मुद्दे के बारे में गंभीर होने का संदेश देने के लिए सरकार को सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के सभी अतिदेय बिलों और प्राप्तियों की एकमुश्त निकासी का आदेश देने का निर्णय लेना चाहिए। सरकार को सभी सीपीएसयू को अपने पूरे बकाया बिलों का 30 दिनों में भुगतान करने का निर्देश देना चाहिए और उन सीपीएसयू को पर्याप्त धन उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाना चाहिए जो अपने भुगतान दायित्वों को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधनों की कमी की रिपोर्ट करते हैं। उन्होंने यह भी कहा की GeM पोर्टल पर सरकारी डिपार्टमेंट पर नियमित समय पर पेमेंट लेने का दबाव बनाना चाहिए। देरी करने पर उन्हें MSME सप्लायर की पेमेंट पर ब्याज देना चाहिए।

इंडियन इंडस्ट्रीज़ असोसिएशन नोएडा चैप्टर के सचिव श्री नवीन गुप्ता का कहना है कि पहले से ही कच्चे माल की कीमतें बहुत अधिक हैं और नियंत्रित नहीं हैं। ऐसे में सरकार को एमएसएमई क्षेत्र को अधिक लोन देने पर ध्यान देना चाहिए। बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को एमएसएमई को ऋण देने में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। मेटल इंडस्ट्रीज, खासकर कॉपर और एलुमिनियम और पॉलीमर पर भी की कस्टम ड्यूटी कम होनी चाहिए और जीएसटी भी घटना चाहिए। ज्यादा ड्यूटी और जीएसटी होने की वजह से, एमएसएमई मैन्युफैक्चरस का प्रोडक्ट करीब 25 से 40 परसेंट महंगा रहता है, इस कमी से हमें बहुत सहायता मिलेगी।

सहसचिव मनीष गुप्ता ने कहा कि यदि एमएसएमई सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना है तो उनके लिए जो R&D सेंटर्स हैं वे भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनने चाहिए व उनमें ट्रेनिंग और टेस्टिंग फैसिलिटी पूरी मिलनी चाहिए, जिससे हमारे इंडस्ट्रीलिस्टस को बाहर से अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की अप्रूवल नहीं करानी पड़े। इंधन सरचार्ज कम होना चाहिए और कमर्शियल व्हीकल्स पर जीएसटी घटना चाहिए जिससे उद्योग जगत को रफ्तार मिल सके।

“एमएसएमई एक आत्मानिर्भर भारत की नींव प्रदान करते हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था का दिल हैं। यह सुनिश्चित करने के साथ कि एमएसएमई को पर्याप्त वित्तीय सहायता मिले।” आशीष वैश्य, कोषाध्यक्ष, इंडियन इंडस्ट्रीज़ असोसिएशन- नोएडा चैप्टर

उपरोक्त राहत उपायों से एमएसएमई क्षेत्र आत्मानिर्भर भारत अभियान की सच्ची भावना में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए अपने विकास को गति देने में सक्षम होगा।