सुरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में प्रदेश की “समृद्ध सांस्कृतिक विरासत” का प्रदर्शन
बैजू बावरा नाटक और रानी दुर्गावती नाट्य नाटिका ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
आगंतुकों को मिल रही प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक संगीत और स्थानीय व्यंजन की झलक
दिल्ली: सूरजकुंड मेले में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड थीम स्टेट के रूप में अपनी समृद्ध और विविध सांस्कृतिक
विरासत को मनमोहक तरीके से प्रदर्शित कर रहा है, जिसमें आगंतुकों को प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक
संगीत और स्थानीय व्यंजन की अनूठी झलक प्रदान की जा रही हैं। इसके साथ ही सोमवार को मध्य प्रदेश से
जुडी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी प्रस्तुत की गयी, जिसमे बैजू बाबरा के प्रेरणादायक नाटक और रानी दुर्गावती
नाट्य नाटिका का प्रदर्शन किया गया।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति एवं प्रबंध संचालक टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा,
“इस भव्य आयोजन के माध्यम से मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और
प्रचारित करने के संकल्प को और मजबूत कर रहा है, जिससे राज्य की अनूठी परंपराएं वैश्विक मंच पर अधिक
पहचान पा रही है।” बता दें सुरजकुंड मेला कला, शिल्प और सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहित करने का एक
महत्वपूर्ण मंच है, जिससे मध्य प्रदेश टूरिज्म की इस भागीदारी से राज्य की समृद्ध परंपराओं को राष्ट्रीय और
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है .
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में 31 देशों की संस्कृतिक प्रस्तुतियां हो चुकी हैं। जिसमे सोमवार को मध्य प्रदेश के
महान संगीत साधक बैजू बावरा नाटक का प्रदर्शन किया गया जिसमें बैजू बावरा के अद्वितीय योगदान को
दर्शाने के लिए नाटक में उनकी संगीत रचनाओं का जीवंत प्रदर्शन किया गया, यह नाटक बैजू बावरा के जीवन से
जुड़ी घटनाओं को नृत्य, गायन और संवादों के माध्यम से जीवंत कर भारतीय संगीत के गौरवशाली इतिहास से
अवगत कराने का प्रयास है।
कार्यक्रम की भव्यता को बढ़ाते हुए, रानी दुर्गावती नाट्य नाटिका ने भारत के इतिहास में साहस की प्रतीक रानी
दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित की। नाटक, संगीत और नृत्य के मिश्रण के माध्यम से, नाट्य प्रस्तुति ने रानी
दुर्गावती के अदम्य साहस और आक्रमणकारियों के खिलाफ उनके पौराणिक युद्ध की वीर गाथा का वर्णन किया,
जिसने दर्शकों को अपनी शक्तिशाली कहानी और भावपूर्ण प्रदर्शन से बांधे रखा।
सूरजकुंड मेला, जो दुनिया के सबसे बड़े शिल्प मेलों में से एक के रूप में प्रसिद्ध है, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और
भारत की कलात्मक विविधता की सराहना के लिए एक मंच प्रदान करता है। थीम स्टेट के रूप में मध्यप्रदेश
टूरिज्म बोर्ड की भागीदारी राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर अपनी समृद्ध परंपराओं को संरक्षित और बढ़ावा देने की
अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।


