डॉ श्रॉफ्स चैरिटी आई हॉस्पिटल और पैंडोरम टेक्नॉलॉजीज़ ने अपनी तरह का अलग सेंटर किया लॉन्च
डॉ श्रॉफ्स चैरिटी आई हॉस्पिटल और पैंडोरम टेक्नॉलॉजीज़ ने अपनी तरह का अलग सेंटर लॉन्च किया, जो कॉर्नियल नेत्रहीनता के लिए आधुनिक, रिजनरेटिव थेरेपी प्रदान करेगा
रिजनरेटिव थेरेपी/इलाजों से अनेक मेडिकल समस्याओं का उपचार किया जा सकता है और मरीजों को बेहतर जीवन जीने की एक नई उम्मीद दी जा सकती है
नई दिल्ली: भारत के अग्रणी आईकेयर इंस्टीट्यूट, डॉ श्रॉफ्स चैरिटी आई हॉस्पिटल ने आज बैंगलुरू स्थित पैंडोरम टेक्नॉलॉजी के साथ गठबंधन में अपने अत्याधुनिक सेंटर का उद्घाटन किया, जहाँ कॉर्नियल नेत्रहीनता के शिकार मरीजों को एडवांस्ड रिजनरेटिव थेरेपिटिक्स प्रदान की जाएगी। इस पहल से कॉर्निया की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी और लाखों लोगों को रिजनरेटिव उपचार मिल सकेगा।

डब्लूएचओ के अनुसार कॉर्निया खराब हो जाने के कारण पूरी दुनिया में 4 प्रतिशत से ज्यादा लोग नेत्रहीनता का शिकार हो जाते हैं। इस प्रकार हर साल 1.5 मिलियन से 2मिलियन लोग नेत्रहीन हो रहे हैं। भारत में बाईलेटरल (1.2 मिलियन) और यूनिलेटरल (5 से 6 मिलियन) कॉर्नियल नेत्रहीनता का एक बड़ा भार है। इस तरह की नेत्रहीनता के हर साल 30,000 नए मामले सामने आ रहे हैं। आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक यहाँ प्रतिवर्ष 1,00,000 से ज्यादा कॉर्नियल ट्रांसप्लांट किए जाने की जरूरत है, लेकिन हो केवल 25,000 ही पा रहे हैं।
डॉ वीरेंद्र संगवान, डायरेक्टर ऑफ इनोवेशन, डॉ श्रॉफ्स चैरिटी आई हॉस्पिटल ने कहा, ‘‘मौजूदा समय में कॉर्निया केवल एक स्थिति में ट्रांसप्लांट हो सकता है, और वह तब जब कोई व्यक्ति अपना नेत्रदान करे, यानि वो लोग, जो अपनी मृत्यु के बाद नेत्रदान करने का संकल्प लेते हैं। दुर्भाग्य से नेत्रदान द्वारा मिली 40 प्रतिशत कॉर्निया ट्रांसप्लांट के मानकों को पूरा नहीं कर पाते। कॉर्निया की आपूर्ति नेत्रदान करने वाले लोगों पर निर्भर है, यह हमारी सबसे बड़ी चुनौती है। पैंडोरम टेक्नॉलॉजीज़ के साथ हमारी साझेदारी का उद्देश्य इस चुनौती को हल करना और रिजनरेटिव मेडिसीन के क्षेत्र में इनोवेटिव थेरेपी का विकास करना है, जिसमें मानव टिश्यू की जगह कृत्रिम कोशिकाएं लगाई जा सकें।’’
इस तरह विकसित ‘बायोइंजीनियर्ड कॉर्निया’ टिश्यू पर आधारित एग्ज़ोसोम्स और टिश्यू-मिमेटिक बायोमटेरियल्स द्वारा बनाए जाते हैं ताकि स्वस्थ और कार्यशील कॉर्निया का फिर से विकास हो सके। यह कॉर्निया में लिक्विड ड्रॉप्स के रूप में डाला जाता है, और प्रकाश की किरणों का उपयोग कर 10 मिनट से भी कम समय में ठोस रूप ले लेता है, और कॉर्निया में जुड़ जाता है। इस ठोस मैट्रिक्स में बायोपॉलिमर एग्ज़ोसोम्स के सतत उत्सर्जन में मदद करता है, जो अल्सरेशन, सूजन जैसी स्थितियों को रोकता है,फाईब्रोसिस को पलट देता है, और नसों का पुनः निर्माण कर कॉर्निया की मोटाई को ठीक करता है।
डॉ संगवान ने कहा, ‘‘एक बायो-प्रिंटेड कॉर्निया या लिक्विड कॉर्निया द्वारा मरीजों को क्षतिग्रस्त कॉर्निया को कम से कम सर्जरी द्वारा फिर से विकसित करने में मदद मिलेगी। इसके लिए किसी सिलाई या किसी नेत्रदान की जरूरत नहीं पड़ती, और ये ड्रॉप्स उसी तरह से कॉर्निया की दरारों को भर देती हैं, जैसे किसी सांचे में लिक्विड भर जाता है।’’
इस अवसर पर डॉ. तुहिन भौमिक, सीईओ एवं डायरेक्टर, पैंडोरम टेक्नॉलॉजीज़ ने कहा, ‘‘डॉ. श्रॉफ्स चैरिटी आई हॉस्पिटल के साथ हमारी साझेदारी काफी सफल रही है। हम श्रॉफ्स-पैंडोरम फॉर ऑक्युलर रिजनरेशन (एसपी-कोर) सेंटर लॉन्च करके बहुत उत्साहित हैं, यह कॉर्नियल नेत्रहीनता के शिकार मरीजों की दृष्टि फिर से वापस लाने की एक पहल है। हमारा फ्लैगशिप उत्पाद बायोइंजीनियर्ड कॉर्निया स्वस्थ कॉर्निया के पुनर्निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए कॉर्निया-मिमेटि बायोमटेरियल द्वारा मॉलिक्युलर संदेश देता है। यह एक इनोवेटिव पहल है, जिसके परिणाम प्रि-क्लिनिकल अध्ययनों में देखे जा चुके हैं, और इस समय यह एक एडवांस्ड थेरेपी के रूप में क्लिनिकल रैगुलेशन के अंतर्गत है। यह ‘मेड इन इंडिया, फॉर द वर्ल्ड’ का एक बेहतरीन उदाहरण है। मरीज के बेड से लैब की बेंच तक का मार्ग ट्रांसलेशन सेंटर, एसपी-कोर द्वारा तैयार किया जाता है, जो श्रेणी में प्रथम, पहली मानव थेरेपी के क्लिनिकल ट्रांसलेशन सफल होने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।’’
डॉ. उमंग माथुर, सीईओ एवं एग्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर, डॉ श्रॉफ्स चैरिटी आई हॉस्पिटल ने कहा, ‘‘यह इनोवेटिव इलाज नेत्रहीनों के लिए काफी संभावनाएं लेकर आया है, और उन्हें बेहतर परिणामों और बेहतर जीवन की एक नई उम्मीद देता है। इस अत्याधुनिक केंद्र में ऐसी एडवांस्ड रिजनरेटिव थेरेपीज़ का और ज्यादा विकास हो सकेगा, जो टिश्यू रिजनरेशन और रिपेयर संभव बनाकर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में परिवर्तन ला सकें। मैं डॉ संगवान को धन्यवाद देता हूँ, जिनके जोश और समर्पण ने नेत्रहीनता को ठीक करने का यह मिशन आगे बढ़ाया। इससे भविष्य में कॉर्नियल नेत्रहीनता के लिए ट्रांसप्लांट के अलावा अन्य विकल्प भी उपलब्ध हो सकेंगे।’’


