बिरसा मुण्डा के जन्मदिवस पर जनजातियों ने मनाया जनजातिय गौरव दिवस
गाजीपुर आज भाजपा कार्यालय पर स्वतंत्रा सेनानी बिरसा मुंडा के 147 वें जन्मदिवस पर आयोजित जनजातिय गौरव दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह ने बिरसा मुंडा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा की बिरसा मुंडा एक युवा स्वतंत्रता सेनानी और एक आदिवासी नेता थे. उन्हें 19वीं सदी के अंत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक सशक्त विद्रोह के लिए याद किया जाता है,

जिससे अंग्रजी हुकूमत खार खाती थी. बिहार और झारखंड के आदिवासी इलाकों में जन्मे और पले-बढ़े बिरसा मुंडा के राष्ट्रीय आंदोलन को याद करते हुए, वर्ष 2000 में उनकी जयंती पर झारखंड राज्य बनाया गया था वही श्री सिंह ने कहा की देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने अंत्योदय योजना गरीब पिछङे अनुसूचित जनजाति का सम्मान अगर कही हुआ संभव हो पाया हो तो वह देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू को बनाकर जनजातीय को सम्मान और देश में एक संदेश भी देने का काम किया गया देश सबका है सम्मान सबका होगा ना कोई छोटा है ना कोई बड़ा है . इस मौके पर अनुसूचित जनजातिय मोर्चा के जिलाध्यक्ष विनोद खरवार ने कहा की
15 नवंबर, 1875 को जन्मे बिरसा ने अपना अधिकांश बचपन अपने माता-पिता के साथ एक गांव से दूसरे गांव में घूमने में बिताया. वह छोटानागपुर पठार क्षेत्र में मुंडा जनजाति के थे. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सलगा में अपने शिक्षक जयपाल नाग के मार्गदर्शन में प्राप्त की. जयपाल नाग की सिफारिश पर, बिरसा ने जर्मन मिशन स्कूल में शामिल होने के लिए ईसाई धर्म अपना लिया. हालांकि, उन्होंने कुछ वर्षों के बाद स्कूल छोड़ दिया.

ब्रिटिश औपनिवेशिक शासक और आदिवासियों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के मिशनरियों के प्रयासों के बारे में जानने के बाद, उन्होंने 'बिरसैत' की आस्था शुरू की. जल्द ही मुंडा और उरांव समुदाय के सदस्य बिरसैट संप्रदाय में शामिल होने लगे और यह ब्रिटिश धर्मांतरण की राह में चुनौती बन गया. इस मौके पर मुख्य रूप से भाजपा जिला महामंत्री प्रवीण सिंह ओम प्रकाश राय दया शंकर पांडे अच्छे लाल गुप्ता पिंटू गोङ दिना नाथ गोङ मौजूद रहे। इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षताअनुसूचित जनजाति मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष ब्रह्मदेव खरवार ने किया।


