सरदार पटेल नहीं होते तो भारत का मानचित्र वह नहीं होता, जो आज है- मीनाक्षी लेखी

सरदार पटेल नहीं होते तो भारत का मानचित्र वह नहीं होता, जो आज है- मीनाक्षी लेखी

नई दिल्ली। केंद्रीय संस्कृति और विदेश राज्यमंत्री श्रीमती मीनाक्षी लेखी ने कहा कि आजादी के बाद भारत के पुनर्निमाण में बहुत सारे नेताओं का योगदान है। लेकिन 1947 और 1950 के बीच जो योगदान लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का है, वह अतुलनीय है। यह बात उन्होंने सरदार पटेल के जीवन और भारत के एकीकरण के उनके महान कार्य पर आधारित फोटो प्रदर्शनी “सरदार पटेल- एकीकरण के शिल्पी” के उद्घाटन पर कहीं। संस्कृति मंत्रालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् (आईसीएचआर) द्वारा ललित कला अकादमी की कला दीर्घा- 8 में आयोजित यह प्रदर्शनी सरदार पटेल के जन्मदिन, 31 अक्तूबर तक चलेगी।

सरदार पटेल के योगदान को याद करते मीनाक्षी लेखी ने कहा, “आज जो भारत का मानचित्र है, वह नहीं होता, अगर सरदार पटेल जैसा सशक्त नेतृत्व उस समय हमारे पास नहीं होता।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लाल किले से अपने भाषण में ‘पंच प्रण’ की जो बात की थी, उसमें एक प्रण एकता और अखंडता का भी है। सरदार पटेल देश की एकता और अखंडता के प्रतीक पुरुष हैं।

श्रीमती लेखी ने कहा कि एकता का एक अर्थ राजनीतिक एकता भी है। दुनिया के जिन देशों ने खूब तरक्की की है, वह एकता और अखंडता के बल पर ही की है। उन्होंने कहा कि भारत विविधता में एकता का देश है, हालांकि यह कहना ज्यादा सटीक होगा कि भारत एकता में विविधता का देश है। एकता के सूत्र हमारे देश में अदृश्य रूप से हर जगह बिखरे पड़े हैं। यह प्रदर्शनी ‘पंच प्रण’ के विचारों का पूरी तरह समावेश करती हैं। उन्होंने आग्रह किया कि अधिक से अधिक लोग इस प्रदर्शनी को देखने आएं और सरदार पटेल के जीवन से प्रेरणा लें तथा देश की अखंडता व एकता के लिए कार्य करें।

इस मौके पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि कहा कि ‘पंच प्रण’ का एक प्रण एकता और एकजुटता भी है। उन्होंने प्रदर्शनी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि देश में कई स्थानों पर यह प्रदर्शनी डिजिटल स्वरूप में चल रही है। यह सभी के लिए खुली हुई है, इसे कोई भी डाउनलोड कर प्रदर्शित कर सकता है। अभी तक 500 से ज्यादा लोगों और संस्थाओं द्वारा इस प्रदर्शनी को डाउनलोड किया जा चुका है। प्रदर्शनी के हिन्दी और अंग्रेजी संस्करण को इस लिंक पर क्लिक करके डाउनलोड किया जा सकता है- https://amritmahotsav.nic.in/unity-festival.htm 

भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् (आईसीएचआर) के सदस्य सचिव प्रो. उमेश अशोक कदम ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल सही अर्थों में आधुनिक भारत के निर्माता थे। उनके योगदान के बारे में जनसाधारण को विस्तार से बताए जाने की जरूरत है। कार्यक्रम के अंत में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के जनपद संपदा विभाग के अध्यक्ष डॉ. के. अनिल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।