गीत, नृत्य और हास्य परिहास के साथ मना फागुन उत्सव
नोएडा। सेक्टर 128 जेपी विशटाउन में फागुन महोत्सव के अवसर पर होली के रंग हास्य के संग आयोजन किया गया जिसमें कथक महोत्सव की प्रस्तुतियों में होली की धूम रही। होली के उपलक्ष्य में फाउडेंशन फार कृष्णा कला से जुडे कलाकारों ने कथक की प्रस्तुती दी नृत्य कला साहित्य के इस अनूठे संगम में आयोजन समिति ने बताया कि जेपी विशटाउन संस्कृति समिति एवं कृष्ण कला फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस आयोजन में उल्लास के कई रंग हैं। जिसमें सबसे पहले प्रख्यात नृत्यांगना डॉ अनु सिन्हा के निर्देशन में नृत्य कलाकारों, संगीत साधकों एवं लोक कलाकारों द्वारा शानदार प्रस्तुति है और दूसरे भाग में हास्य कवि विनोद पाण्डेय के संचालन में हास्य कवि का आयोजन है ।
नृत्य संगीत के कार्यक्रम का संचालन शरद मिश्र एवं डॉ सीमा कुमारी जी द्वारा संपन्न होगा। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ अनु सिन्हा एवं समूह द्वारा गणेश वंदना की प्रस्तुति से हुई, तत्पश्चात अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विदुषी कंकणा बनर्जी द्वारा शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति और फिर राजा एवं राजकुमार द्वारा होली के लोकगीत की प्रस्तुति हुई होली के रंग हास्य के संग में और भी कई कार्यक्रम हैं जिसमें अंशिका भदौरिया एवं समूह द्वारा राधा कृष्ण की होली प्रस्तुति, गोविंद , अमी , सागर , हिरदेव, अंकित द्वारा राग मंड पर आधारित कत्थक शैली में सुन्दर प्रस्तुति , कुमारी बृजेश एवं समूह की प्रस्तुति, मोनिका शर्मा एवं समूह की प्रस्तुति होलिया, दीक्षा एवं समूह की प्रस्तुति, दक्ष एवं समूह की प्रस्तुति, डॉ अनु सिन्हा जी एवं समूह की प्रस्तुति रंग डारूंगी, राजेश पांडेय की कजरी, चैती, होली के गीतों की सुन्दर प्रस्तुति जैसी और भी कई उल्लेखनीय प्रस्तुति है जो दशकों का मन मोहा इसके बाद देश के प्रख्यात हास्य व्यंग्य कवि अपनी रचनाओं का पाठ करके हास्य रंग बिखेरा , काव्य पाठ करने वाले कवियों में सर्वश्री दीपक गुप्ता, मधु मोहिनी उपाध्याय, विनोद पाण्डेय, ममता वाष्णेय, दीपाली जैन, पीयूष मालवीय एवं दिनेश कपूर जी का नाम उल्लेखनीय है ।
जेपी विशटाउन संस्कृति समिति वर्ष भर साहित्य, समाज और संस्कृति के लिए सुन्दर सुन्दर कार्यक्रम करती रहती है l कृष्ण कला फाउंडेशन की निर्देशिका डॉ अनु सिन्हा के निर्देशन में होने वाले इस अयोजन में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार , संगीत नाटक अकादमी एवं एनटीवी का सहयोग महत्वपूर्ण रहा।


