नोएडा,PNI NEWS: फोर्टिस हाॅस्पिटल, नोएडा के न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट में हाल में दुर्लभ ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित दो महिलाओं षालिनी (22) और इराकोजे मैमी कैरीन (24) का सफलतापूर्वक आॅपरेषन कर उन्हें दोबारा खुषहाल और संपूर्ण जिंदगी जीने का मौका दिया है। भारत में भी ब्रेन ट्यूमर के मामले और इसकी मौजूदगी तेजी से बढ़ रही है। भारत सरकार के नैषनल हेल्थ पोर्टल पर बचपन में कैंसर पर मौजूद एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि बचपन में ब्रेन ट्यूमर से लड़कियों के पीड़ित होने की आषंका अधिक रहती है जबकि वयस्क होने पर लड़के-लड़कियों में यह होने की समान आषंका1 होती है।
षालिनी और इराकोजे को फोर्टिस, नोएडा में अलग-अलग गंभीर अवस्था में लाया गया था। उन दोनों के लक्षण- सिरदर्द, उबकाई और एमेनोरिया एक जैसे थे। टेस्ट और जांच के बाद खुलासा हुआ कि वे दोनों ही स्कल ब्रेन ट्यूमर पिटयूईटरी एडीनोमा (पिट्यूइटरी ग्लैंड में होने वाला) था। फोर्टिस हाॅस्पिटल, नोएडा में न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट के एडिषनल डायरेक्टर डाॅ. राहुल गुप्ता और न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डाॅ. एचएस भाटो के नेतृत्व में डाॅक्टरों की टीम ने पूरी जांच के बाद बेहद जटिल और सतर्कता के साथ सर्जरी कर इन ट्यूमरों को सफलतापूर्वक बाहर षरीर से निकाल दिया।
षालिनी को पिछले करीब डेढ़ साल से अक्सर सिरदर्द और उलटी की षिकायत हो रही थी। इसके अतिरिक्त पिछले एक साल से उनका मासिक धर्म भी अनियमित और असंगत था। दक्षिण अफ्रीका के रवांडा से फोर्टिस हाॅस्पिटल, नोएडा आई इराकोजे को भी यही समस्याएं थी। उन्हें धुंधला दिखाई देता था, डिप्लोपिया, इन्सोमनिया, बोलने व चलने में तकलीफ और कब्ज की भी लगातार षिकायत रहती थी।
फोर्टिस हाॅस्पिटल, नोएडा के न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट के एडिषनल डायरेक्टर डाॅ. राहुल गुप्ता ने कहा, ’’दोनों रोगियों में नाक और स्फीनाॅयड साइनस के जरिए एंडोस्कोपिक पिट्यूइटरी स्कल बेस्ड सर्जरी की गई, जिसमें पिट्यूइटरी ट्यूमर निकाले गए। एंडोस्कोप की आॅप्टिकल खूबी के कारण जटिल मामलों में भी एंडोस्कोपी के जरिए ट्यूमर निकाला आसान हो जाता है। यह सर्जरी प्राकृतिक नेजल एयर पाथवे (ष्वास नली) के जरिए की गई और इसमें पारंपरिक माइक्रोस्कोपिक सर्जरी की तरह कहीं कोई चीरा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। अगर इलाज प्रोटोकाॅल का सही ढंग से पालन किया जाए तो पूरी रिकवरी सुनिष्चित की जा सकती है। इसके बाद रोगी को 4 दिन में डिस्चार्ज भी कर दिया जाता है।’’
फोर्टिस हाॅस्पिटल, नोएडा के न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डाॅ. (ब्रिगेडियर) एचएस भाटो ने कहा, ’’एंडोस्कोपिक सर्जरी में मेटालिक ट्रांस स्फीनाॅयडल रिट्रैक्टर की जरूरत नहीं होती है, जिसे पारंपरिक ’’माइक्रोस्कोपिक ट्रांसनेजल ट्रांसस्फीनाॅयडल पिट्यूइटरी ट्यूमर’’ सर्जरी में किया जाता है। इस सर्जरी में एक 4 मिलीमीटर के एंडोस्कोप को ट्यूमर के सामने स्फीनाॅयडल साइनस में रखा जाता है और विषेश तौर पर डिजाइन किए गए सर्जिकल टूल्स के जरिए ट्यूमर निकाल दिया जाता है। आॅपरेषन के बाद नेजल पैकिंग की आवष्यकता नहीं होती और आॅपरेषन के बाद रोगी को बहुत अधिक असहज भी महसूस नहीं होता है। एंडोस्कोप की आॅप्टिकल खूबी के कारण भारी ट्यूमर के जटिल मामलों में भी ट्यूमर निकालना आसान हो जाता है।’’
फोर्टिस हाॅस्पिटल, नोएडा के जोनल डायरेक्टर डाॅ. कौसर ए षाह ने कहा, ’’फोर्टिस हाॅस्पिटल, नोएडा ने पहले भी कई जटिल सर्जरी की हैं। ये मामले चुनौतीपूर्ण थे क्योंकि ये ब्रेन ट्यूमर के दुर्लभ मामले थे, जिनकी अभी तक जांच नहीं हुई थी। हमारी टीम ने सर्जरी के लिए अपारंपरिक प्रक्रिया अपनाने का फैसला किया और दोनों रोगियों की जान बचाने में सफल रही। हम एक अंतरराश्ट्रीय रोगी की जान बचाने में सफल रहे और यह इस बात का प्रमाण है कि हम रोगी केंद्रित गुणवत्तापूर्ण हेल्थकेयर सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम हैं।’’
ब्रेन ट्यूमर तब होता है जब मस्तिश्क के किसी भी हिस्से में कोषिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं। नर्वस सिस्टम ट्यूमर, मस्तिश्क में कोषिकाओं का असामान्य विकास होता है, जिससे न्यूरोसिस्टम की उचित कार्यव्यवस्था गड़बड़ हो जाती है। ब्रेन ट्यूमर के कारण दिखने वाले लक्षण ट्यूमर के आकार, प्रकार और वह किस जगह स्थित है, इस पर निर्भर करते हैं। यह जरूरी नहीं है कि सभी ट्यूमर कैंसरकारक हों लेकिन असामान्य कोषिकाएं ’’निर्धारित कार्य’’ पूरा करने में असफल रहती हैं और इस वजह से नजदीकी कोषिका के कार्य में भी व्यवधान उत्पन्न करती है। भारत में हर साल 40,000 से 50,000 लोगों में ब्रेन ट्यूमर पाया जाता है। एक साल पहले तक यह आंकड़ा इसका सिर्फ 5 फीसदी तक था। ब्रेन ट्यूमर फाउंडेषन आॅफ इंडिया के अनुसार यह ल्यूकेमिया के बाद बच्चों में दूसरा सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर है। पिट्यूइटरी, षरीर में बेहद महत्वपूर्ण ग्लैंड (ग्रंथि) होती है और इसलिए अक्सर इसे ’मास्टर ग्लैंड’ भी कहा जाता है क्योंकि यह षरीर में मौजूद अन्य हाॅर्मोन ग्रंथियों को भी नियंत्रित करती है।

 

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