नोएडा के निवासियों के परेशानी के लिए जिम्मेदार कौन ?

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नोएडा के निवासियों के परेशानी के लिए कौन जिम्मेदार है?
मेट्रो के उद्घाटन में प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री मंत्री सांसद विधायक सभी उद्घाटन में आते हैं फीता काटते हैं फोटो खिंचवाते हैं भाषण देते हैं और चले जाते हैं। लेकिन खामिया किसी को नहीं दिखी । ज्ञात हो कि नोएडा सेक्टर 51 एवं सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन के बीच मुश्किल से दूरी 200 मीटर की है । सेक्टर 52 से ब्लू लाइन पास करती है जो सेक्टर 62 एवं द्वारका की तरफ जाती है जबकि सेक्टर 51 से चलने वाली एक्वा मेट्रो लाइन ग्रेटर नोएडा तक जाती है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में महिलाएं बुजुर्ग छात्र एवं कामकाजी लोग इससे सफर करते हैं। दोनों मेट्रो स्टेशन अलग अलग होने के कारण लोगों को तकलीफ झेलनी पड़ रही है। मेट्रो कारपोरेशन के अधिकारियों की अदूरदर्शिता के कारण लोग परेशान हो रहे हैं ।ग्रेटर नोएडा की तरफ आने वाले लोग को अगर सिटी सेंटर की तरफ जाना है तो फिर उन्हें, पहले मेट्रो से बाहर आना पड़ता है और फिर सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन में एंट्री करनी होती है ।उसी प्रकार से जो सेक्टर 62 से या सिटी सेंटर की तरफ से आने वाले लोग, ग्रेटर नोएडा जाना चाहते हैं तो उन्हें सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन से बाहर निकल कर फिर उन्हें सेक्टर 51 का मेट्रो स्टेशन के अंदर जाना पड़ता है ।इस दौरान काफी समय लगता है एवं परेशानियों का सामना करना पड़ता है । उन्हें दोबारा मेट्रो एंट्री के दौरान जांच करानी होती है एवं लाइन में लगना कर स्टेशन में एंट्री करनी पड़ती है। जिसमें काफी समय व्यर्थ होता है और थकान बढ़ जाती है ।अगर एक खंभा और बढ़ा दिया जाता तो इन दोनों मेट्रो स्टेशन की जगह एक मेट्रो कॉमन मेट्रो स्टेशन बन जाता जिससे यात्रियों की समस्याएं कम हो जाती साथ ही दो मेट्रो स्टेशन पर लगने वाला करोड़ों का निर्माण खर्च भी कम हो जाता। प्रतीत होता है कि डीएमआरसी एवं एनएमआरसी के बीच तालमेल के अभाव में यह गलत तरीके से निर्माण हुआ है ।जिसके कारण हजारों नोएडा के निवासियों को परेशानी का प्रतिदिन सामना करना पड़ रहा है ।इसके साथ ही विकास मार्ग, जो 71 के चौराहे से, होकर नोएडा एक्सटेंशन जाती है उसे बंद कर दिया गया है ।इस कारण से वहां भीषण ट्रैफिक, ऑफिस टाइम के समय हो जाती है। दोनों मेट्रो स्टेशन के पास ऑटो ई-रिक्शा एवं अन्य वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है ।जिससे ट्रैफिक में व्यवधान पड़ता है ।लेकिन उद्घाटन के लिए आए मुख्यमंत्री मंत्री सांसद विधायक आदि लोगों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता उन्होंने मेट्रो अधिकारियों से सवाल जवाब नहीं किया कि यह दो अलग-अलग रूट के मेट्रो स्टेशन अलग अलग क्यों बने हैं इसे कॉमन मेट्रो स्टेशन क्यों नहीं बनाया गया। हम जिम्मेदार भारतीय के टैक्स के पैसों की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है? नेताओं का मतलब सिर्फ उद्घाटन करके पेपर में फोटो खिंचवाने भर तक का है ।आम जनता की मेहनत, एवं इमानदारी से जमा किए टैक्स की यह बर्बादी है। अधिकारियों अधिकारियों अधिकारी मनमर्जी के अनुसार अपना फैसला लेते हैं जो कई बार जनता के हित में नहीं होता है लेकिन उन पर अंकुश लगाने वाला जनप्रतिनिधि सांसद विधायक मंत्री मुख्यमंत्री सारे आंख बंद किए होते हैं इसलिए नोएडा शहर में भरपूर राजस्व मिलने के बाद भी यहां के निवासियों के लिए कोई सुविधा नहीं है ।यह शहर प्रतिदिन ट्रैफिक प्रदूषण एवं अतिक्रमण के आगोश में फंसता चला जा रहा है।

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