कश्मीर केवल भूभाग ही नहीं हमारी संस्कृति का केंद्र है – चन्द्रपाल प्रजापति

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नोएड़ा।PNI News। विपक्ष के हंगामे के बीच राज्यव सभा में गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मूर-कश्मी र के लिए ऐतिहासिक बदलाव की पेशकश की। उन्हों ने यहां से अनुच्छे द 370 व 35(ए) हटाने की सिफारिश की। इसके अनुसार, जम्मूक-कश्मी र को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। लद्दाख भी अलग केंद्र शासित प्रदेश बनेगा।
क्या है धारा 370 ? धारा 370 भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद है। यह आर्टिकल 21 के अंतर्गत आता है। जिसका शीर्षक है अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध। इसी के जरिए जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा हासिल है। इसका प्रारूप नेहरू के खास शेख अब्दुल्ला ने तैयार किया था। जिसे संविधान सभा में आयंगर ने धारा 306-ए का प्रारूप पेश किया, यही बाद में धारा 370 बनी। इसी के चलते 1951 में राज्य को अलग संविधान सभा बैठाने की इजाजत मिली। 26 जनवरी 1957 से राज्य में विशेष संविधान लागू है। जम्मू-कश्मीर का भारत में बिना शर्त विलय हुआ था। एक अलग मुल्क पर हुकूमत करने की शेख अब्दुल्ला की इच्छा का भारतीय संविधान में इंतजाम धारा 370 के रूप में है।
डॉ. मुखर्जी ने इस समझौते को नेहरू की तुष्टीकरण  नीति और स्वयं को चमकाने का प्रयत्न बताते हुए कड़ा विरोध किया था। संसद में अपने भाषण में डॉ॰ मुखर्जी ने धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की। अगस्त 1952 में जम्मू की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊंगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूंगा। 17 फरवरी, 1953 को पं. नेहरू को भेजे एक पत्र में उन्होंने लद्दाख क्षेत्र की स्वायत्तता की भी बात की थी, डॉ. मुखर्जी के प्रभाव और उनके साथ चलने वाले जन दबाव ने भरपूर असर दिखाया था।
कश्मीर में बहुत कुछ नया हो रहा है। दशकों की रक्षात्मक नीति का स्थान आक्रामक नीति ने ले लिया है। सक्रियता ने प्रतिक्रियावाद को विस्थापित कर दिया है। उधर कश्मीर के अलगाववादी नेता धमकाते रहे कि “धारा 370 और 35 ए को हाथ लगाया, तो कश्मीर अलग हो जाएगा, जलजला आ जाएगा,” इधर मोदी सरकार ने अलगाववादियों की मुश्कें कसनी शुरू कर दीं और 35 ए पर मुक्त चर्चा भी प्रारंभ कर दी है। अलगाववादी नेता बदहवास हैं, यहां क़ानून पीछे पड़ा है, वहां आईएसआई। ऐशोआराम की नेतागिरी के दिन लद चुके हैं। पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बार-बार रुसवा हो रहा है। कश्मीर में जिहाद का नारा देने वाला हाफ़िज़ सईद अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया गया है। सर्जिकल स्ट्राइक के सदमे से पाकिस्तान फौजी अभी भी उभर नहीं पाए हैं, इधर कश्मीर में भारतीय सेना के हाथ खोल दिए गए हैं। सर्जिकल स्ट्राइक ने आतंकियों के भी हौसले को तोड़ा है। एनआईए रोज छापे मार रही है। नया क़ानून बनाकर उसकी ताकत को कई गुना बढ़ा दिया गया है। कांग्रेस व अन्य विपक्षी बयान दे रहे हैं कि सरकार कश्मीर में भय फैला रही है, लेकिन सचाई यही है कि बरसों से कश्मीर में अलगाववाद का धंधा कर रहे लोग ही भयभीत हैं, और पाकिस्तान परेशान है, क्योंकि उसके घाटी में उसके प्यादे पिटते जा रहे हैं।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने हर भारतवासी की आकांक्षा को पूरा कर दिया है। सरकार ने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का विधेयक भी पेश कर दिया। लद्दाख अब जम्मू-कश्मीर का हिस्सा नहीं रहेगा। यह बिना विधानसभा का केंद्र शासित प्रदेश होगा। बाकी बचे जम्मू-कश्मीर को भी केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा होगा। इसमें दिल्ली जैसी सीमित शक्तियों वाली विधानसभा होगी। इसी प्रकार नेहरू ने शेख अब्दुल्ला के साथ मिलकर जो नासूर तैयार किया था, मोदी ने उसकी सर्जरी कर दी है।

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